भारतकोश
समझ से प्राप्त ब्रह्मचर्य

समझ से प्राप्त ब्रह्मचर्य

Samaj Se Prapt Brahmacharya

दादा भगवान द्वारा

स्रोत: दादा भगवान आराधना ट्रस्ट, 'दादा दर्शन', उस्मानपुरा, अहमदाबाद · दादा भगवान आराधना ट्रस्ट · 2005 (उद्गम)

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समझ से प्राप्त ब्रह्मचर्य (पूर्व)

प्रश्नकर्ता : तो सामनेवाले का फ्रैक्चर कैसे कर सकते हैं?

दादाश्री : हजार रास्ते हैं! नहीं तो एक दिन तो उसे मुँह पर कह देना कि 'क्या करूँ, मेरा मन दुविधा में है! तेरे जैसी दो-तीन हैं। सभी को वचन दिए हैं' कहना। यह तो यहाँ से चिट्ठी लिखता है कि, 'मुझे अच्छा नहीं लगता तेरे बिना।' तब छूटेगा कैसे? फिर और ज्यादा चिपकेगी वह। अब तुझे आ जाएगा न?

अपना बनाया कहकर डियर, तोड़ो देकर फियर

अपना विज्ञान इतना सुंदर है कि हर तरह से आपको एडजस्ट हो जाए। बाहर का एक्सेस हो जाए तो आत्मा खो देता है। बहुत जोरदार हो गया हो तो आत्मा का वेदक चला जाता है। ज्ञाता-दृष्टापन चला जाए और भ्रांति में डाल दे, वह है मोहनीय कर्म।

प्रश्नकर्ता : बाहर का एक्सेस हो जाता है, ऐसा आपने कहा न, ऐसा कैसे है वह?

दादाश्री : किसी को स्त्री के साथ एकता हो गई। अब खुद छोड़ना चाहे लेकिन अगर वह छोड़े तब न? तू उसे मिला नहीं न, फिर भी वह तुम्हारे ही बारे में सोचती रहेगी। तुम्हारे विचार करती रहे, तो तुम बंधे हुए कहलाओगे। विचारों से ही बंधे हुए। वे विचार बंद होते नहीं और अपना छुटकारा हो नहीं पाता। इसलिए पहले समझ लेना चाहिए। और उसके विचार तोड़ने के लिए क्या करना पड़ेगा? उसके साथ झगड़े करने पड़ेंगे, ऐसा करना चाहिए, उसे सब उल्टा-उल्टा बताना चाहिए। दूसरी लड़की को यों ही कहना, तुम तो मेरी बहन हो, कहकर चलो जरा मेरे साथ घूमने, ऐसा उसे दिखाना, मतलब उसका मन फैंक्चर कर देना, धीरे से।

प्रश्नकर्ता : दूसरीवाली चिपक जाए तो?