समझ से प्राप्त ब्रह्मचर्य
Samaj Se Prapt Brahmacharya
दादा भगवान द्वारा
स्रोत: दादा भगवान आराधना ट्रस्ट, 'दादा दर्शन', उस्मानपुरा, अहमदाबाद · दादा भगवान आराधना ट्रस्ट · 2005 (उद्गम)
पृष्ठ 299, कुल 482 में से
संदर्भ में पढ़ें२४६
समझ से प्राप्त ब्रह्मचर्य (पू)
दादाश्री : नहीं, तैयारी में सिर्फ़ इतना ही नहीं चलेगा। अभी तो ठेठ तक लश्कर रखना पड़ेगा।
प्रश्नकर्ता : संपूर्ण सेफ़ साइड कब होगी?
दादाश्री : संपूर्ण सेफ़ साइड कब होगी, उसका तो ठिकाना ही नहीं न! लेकिन पैंतीस साल के बाद ज़रा उसके दिन ढलने लगते हैं, इसलिए वह आपको बहुत परेशान नहीं करता। फिर आपके तय किए अनुसार चलता रहेगा, वह आपके विचारों के अधीन रहेगा। आपकी इच्छा नहीं बिगड़ेगी तो फिर आपको कोई नुकसान नहीं पहुँचाएगा। लेकिन पैंतीस साल तक तो बहुत ही जोखिम है!
प्रश्नकर्ता : पैंतीस साल तक सेफ़ साइड क्या है?
दादाश्री : वह तो अपना निश्चय! दृढ़ निश्चय और साथ में प्रतिक्रमण!
प्रश्नकर्ता : एक बार निश्चय दृढ़ हो जाए तो उसके बाद में क्या?
दादाश्री : बाद में निश्चय डगमगाए नहीं तो बहुत हो गया!
प्रश्नकर्ता : अभी हमारा निश्चय दृढ़ हो गया कहलाएगा?
दादाश्री : अभी नहीं माना जाएगा। अभी तो बहुत देर लगेगी। इसलिए अभी तो तुम्हें ब्रह्मचारियों के संग में ही रहना है। बाकी निर्भयपद है, ऐसा मान लेने जैसा नहीं है।
प्रश्नकर्ता : लश्कर मतलब क्या? प्रतिक्रमण?
दादाश्री : प्रतिक्रमण और दृढ़ निश्चय, यह सारा लश्कर रखना पड़ेगा और 'ज्ञानीपुरुष' के दर्शन। इस दर्शन से अलग हो जाओ तो भी गड़बड़ हो जाएगी। अतः सेफ़ साइड कोई आसान चीज़ नहीं है।
प्रश्नकर्ता : आपने कहा था कि ब्रह्मचारियों का संग, संसारियों