समझ से प्राप्त ब्रह्मचर्य
Samaj Se Prapt Brahmacharya
दादा भगवान द्वारा
स्रोत: दादा भगवान आराधना ट्रस्ट, 'दादा दर्शन', उस्मानपुरा, अहमदाबाद · दादा भगवान आराधना ट्रस्ट · 2005 (उद्गम)
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से दूर और सत्संग की पुष्टि, इन तीन 'कॉजेज' का सेवन होगा तो सबकुछ हो जाएगा।
दादाश्री : यह सब निश्चय को हेल्प करता है और निश्चय मजबूत करना, वह अपने हाथ की बात है न!
सत्संग के परिचय में रहने से इंसान बिगड़ता नहीं है। कुसंग के परिचय से तो इंसान खत्म हो जाता है। अरे, कुसंग जरा सा भी छू जाए तो भी खत्म हो जाएगा। खीर में जरा सा भी नमक डाल दिया तो?
प्रश्नकर्ता : ऐसा आनंद तो कहीं भी देखा ही नहीं है। इसलिए कहीं भी जाने का मन नहीं करता। यहीं अच्छा लगता है।
दादाश्री : सिनेमा में आनंद मिलता होगा न?
प्रश्नकर्ता : लेकिन फिर बाहर निकलने पर वैसे के वैसे ही।
दादाश्री : हाँ, जैसा था वैसा ही वापस। अठारह रुपये खर्च हो गए और बल्कि परेशानी हो गई, तीन घंटे का टाइम खो दिया। मनुष्य जन्म के तीन घंटे कहीं बिगाड़े जाते होंगे?
प्रश्नकर्ता : तीन घंटे तो देखने में, लेकिन आगे-पीछे दूसरी तैयारी करने में भी समय जाता है न!
दादाश्री : हाँ, ऊपर से वह टाइम अलग। मैं लोगों से पूछता हूँ कि, 'चिंता होती है तब क्या करते हो?' तब कहते हैं कि, 'सिनेमा देखने चला जाता हूँ।' अरे, यह सही उपाय नहीं है। यह तो पेट्रोल डालकर अग्न को बुझाने जैसी बात है। यह जगत् पेट्रोल की अग्न से जल ही रहा है न? उसी तरह क्योंकि यह सूक्ष्म अग्न है इसलिए दिखाई नहीं देती, स्थूल में नहीं जलता।
कलियुग की हवा बहुत खराब है। यह तो ज्ञान की वजह से बच जाते हैं, वर्ना कलियुग की हवा का फटका ऐसा लगता है कि इंसान को खत्म कर दे।