भारतकोश
समझ से प्राप्त ब्रह्मचर्य

समझ से प्राप्त ब्रह्मचर्य

Samaj Se Prapt Brahmacharya

दादा भगवान द्वारा

स्रोत: दादा भगवान आराधना ट्रस्ट, 'दादा दर्शन', उस्मानपुरा, अहमदाबाद · दादा भगवान आराधना ट्रस्ट · 2005 (उद्गम)

DevanagariHindipublished482 पृष्ठ

पृष्ठ 322, कुल 482 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 322

तितिक्षा के तप से गद्गो मन-देह (खं-2-१२)

२६९

इतना तप करने से वह (ब्रह्मचर्य का) तप हो ही जाएगा। महावीर भगवान ने यही किया था न! सभी ने यही किया था न!

प्रश्नकर्ता : इस निश्चय को टिकाकर रखने के लिए कोई उपाय नहीं हो पाते।

दादाश्री : यही उपाय है।

प्रश्नकर्ता : आप कहते हैं, फिर भी मानसिक तैयारी नहीं हो पाती अंदर से।

दादाश्री : तो फिर हमने कहाँ मना किया है, शादी करने को?

प्रश्नकर्ता : आपने तो नहीं कहा लेकिन हमने तो देखा है न! ऐसा प्राप्त होने के बाद, अब तो गलती कर ही नहीं सकते।

दादाश्री : तो फिर डिसाइड करने के बाद कुछ नहीं छू सकता! डिसीजन लेने के बाद अगर ऐसे ढीला बोलोगे तो बल्कि चढ़ बैठोगे। ‘गेट आउट’ कहने से थोड़ा-बहुत बाहर भाग जाएगा। जब वापस आए तो वापस ‘गेट आउट’ कहना।

कंदमूल पोषण दें विषय को

देखा देखीवाला ब्रह्मचर्य व्रत नहीं टिकता। इसलिए फिर जो करना हो, वह करे। लेकिन मैं तो चेतावनी देता हूँ कि ब्रह्मचर्य पालन करना हो तो कंदमूल नहीं खाने चाहिए।

प्रश्नकर्ता : कंदमूल नहीं खाने चाहिए?

दादाश्री : कंदमूल खाना और ब्रह्मचर्य पालन करना, यह रोग फिलॉसॉफि है, विरोधी है?

प्रश्नकर्ता : कंदमूल नहीं खाना, वह जीव हिंसा की वजह से है या दूसरा कोई कारण है?

समझ से प्राप्त ब्रह्मचर्य · पृष्ठ 322, कुल 482 में से · BharatKosha