भारतकोश
समझ से प्राप्त ब्रह्मचर्य

समझ से प्राप्त ब्रह्मचर्य

Samaj Se Prapt Brahmacharya

दादा भगवान द्वारा

स्रोत: दादा भगवान आराधना ट्रस्ट, 'दादा दर्शन', उस्मानपुरा, अहमदाबाद · दादा भगवान आराधना ट्रस्ट · 2005 (उद्गम)

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समझ से प्राप्त ब्रह्मचर्य (पू)

दादाश्री : कंदमूल तो अब्रह्मचर्य को जबरदस्त पुष्टि देनेवाले हैं। ऐसे नियम रखने पड़ते हैं ताकि उसका ब्रह्मचर्य रह पाए-टिक पाए। और जिससे ब्रह्मचर्य टिक सके, उसका भोजन इतना सुंदर होना चाहिए। अब्रह्मचर्य से सारी रमणीयता चली जाती है और जो ब्रह्मचर्य का पालन करे, वह रमणीय बनता है। इसान प्रभावशाली दिखता है।

प्रश्नकर्ता : अभी तक हम कंदमूल नहीं खाते थे। ज्ञान लेने के बाद खाना शुरू किया, तो बाधक नहीं रहेगा? दोष नहीं लगेगा?

दादाश्री : किसे दोष लगेगा इसमें? इस डिस्चार्ज में कैसा दोष? हम इन ब्रह्मचारियों को दोष लगने के लिए नहीं, उन्हें तो अगर यह सब नहीं खाएँगे न, तो विषय का जोर कम हो जाएगा। उन्हें तो ऐसा रक्षण के लिए करना होता है। दोष का और इसका लेनादेना नहीं है।

प्रश्नकर्ता : यह जो वर्णन किया है कि सुई की नोक पर आलू का, उस नाप का एक पीस आए, तो उसमें अनंत जीव होते हैं, उन जीवों को...

दादाश्री : वह सब किसके लिए है? जिसे बुद्धि बढ़ानी हो न, उसके लिए है। उसके आग्रही बन जाएँ तो कब पार आएगा? और यह मोक्ष का मार्ग निराग्रही है। इसे जानना जरूर है और हो सके, उतना कम कर देना है।