भारतकोश
समझ से प्राप्त ब्रह्मचर्य

समझ से प्राप्त ब्रह्मचर्य

Samaj Se Prapt Brahmacharya

दादा भगवान द्वारा

स्रोत: दादा भगवान आराधना ट्रस्ट, 'दादा दर्शन', उस्मानपुरा, अहमदाबाद · दादा भगवान आराधना ट्रस्ट · 2005 (उद्गम)

DevanagariHindipublished482 पृष्ठ

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चेत रे ब्रह्मचारी...

चेतन कर ले विचार, चेतन कर ले विचार, दगा जैसा है संसार, हँसकर बात मत लगा, मोक्ष के लिए हो जा तैयार, नजर से नजर मत मिला, इसलिए चेतकर चल। इसलिए चेतकर चल।

चेतन कर ले विचार, चेतन कर ले विचार, चटनी के लिए खोया थाल नखराली नजरे हो तुच्छकार, विषय में तृप्ति नहीं जरा भी, कड़ी नजर में है उपकार, इसलिए चेतकर चल। इसलिए चेतकर चल।

चेतन कर ले विचार, चेतन कर ले विचार, गाफिल होना नहीं जरा भी, स्त्री सदा दावा करना, दृष्टि दोष से कायम संसार, नौ गज से कर रे नमस्कार, इसलिए चेतकर चल। इसलिए चेतकर चल।

चेतन कर ले विचार, चेतन कर ले विचार, शादी की फाइल है तैयार, नैनों के लागे गोलीबार, कसौटी का यह तेरा काल, हथियार कुंद होते हार, इसलिए चेतकर चल। इसलिए चेतकर चल।

चेतन कर ले विचार, चेतन कर ले विचार, विषय कीचड़ में डूबनेवाले, कड़ी नजर के रख हथियार, विश्व में नहीं मिलते हाथ पकड़नेवाले, टूटते पहले बाँध ले बाड़, इसलिए चेतकर चल। इसलिए चेतकर चल।

चेतन कर ले विचार, चेतन कर ले विचार, निश्चय क्यों डिगाना, चेतना स्त्री के तिरस्कार से, आंधी तो आए बार-बार। छिपा उसमें विषय का रणकार, इसलिए चेतकर चल। इसलिए चेतकर चल।

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