समझ से प्राप्त ब्रह्मचर्य

समझ से प्राप्त ब्रह्मचर्य
Samaj Se Prapt Brahmacharya
दादा भगवान द्वारा
स्रोत: दादा भगवान आराधना ट्रस्ट, 'दादा दर्शन', उस्मानपुरा, अहमदाबाद · दादा भगवान आराधना ट्रस्ट · 2005 (उद्गम)
DevanagariHindipublished482 पृष्ठ
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| चेतन कर ले विचार, | चेतन कर ले विचार, |
|---|---|
| विषय अंत में धिक्कार, | विषय से बंधे नर्कांगार, |
| अणहक्क बाँधे नर्कांगार, | आलोचना एक ही उबारनार, |
| इसलिए चेतकर चल। | इसलिए चेतकर चल। |
| चेतन कर ले विचार, | चेतन कर ले विचार, |
|---|---|
| अग्नि और पेट्रोल मिलनसार, | भयंकर विषय दोष का बोझ, |
| मिलते विषयी भीषण झाल, | आलोचना करके उतार, |
| इसलिए चेतकर चल। | इसलिए चेतकर चल। |
| चेतन कर ले विचार, | चेतन कर ले विचार, |
|---|---|
| विषय है जलानेवाला, | दृष्टि आकर्षित हो जहाँ पलभर, |
| निर्विषयी दादा जैसा बननेवाला, | बीज पड़े होते ही तम्याकार, |
| इसलिए चेतकर चल। | इसलिए चेतकर चल। |
| चेतन कर ले विचार, | चेतन कर ले विचार, |
|---|---|
| शील का ग्रही ले अलंकार, | बीज दो पत्तियों से फूटनार, |
| कल्याणी हेतु आकर्षनार, | उखेड़ तत्क्षण दूर फेंकनार, |
| इसलिए चेतकर चल। | इसलिए चेतकर चल। |
| चेतन कर ले विचार, | चेतन कर ले विचार, |
|---|---|
| श्री विज्ञन से विषय जीतनार, | दो पत्तियाँ फिर तेरी हार, |
| दादापुत्र बनो आप होनहार, | सूक्ष्म में वीर्य स्वल्पन थनार, |
| इसलिए चेतकर चल। | इसलिए चेतकर चल। |
| चेतन कर ले विचार, | चेतन कर ले विचार, |
|---|---|
| स्पर्श दोष जहरीला अपार, | दृष्टि से सूक्ष्म गलन थनार, |
| चेत नहीं तो तू फिसलनार, | स्थूल में फिर न कोई रोकनार, |
| इसलिए चेतकर चल। | इसलिए चेतकर चल। |
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