भारतकोश
समझ से प्राप्त ब्रह्मचर्य

समझ से प्राप्त ब्रह्मचर्य

Samaj Se Prapt Brahmacharya

दादा भगवान द्वारा

स्रोत: दादा भगवान आराधना ट्रस्ट, 'दादा दर्शन', उस्मानपुरा, अहमदाबाद · दादा भगवान आराधना ट्रस्ट · 2005 (उद्गम)

DevanagariHindipublished482 पृष्ठ

पृष्ठ 47, कुल 482 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 47
चेतन कर ले विचार,चेतन कर ले विचार,
विषय अंत में धिक्कार,विषय से बंधे नर्कांगार,
अणहक्क बाँधे नर्कांगार,आलोचना एक ही उबारनार,
इसलिए चेतकर चल।इसलिए चेतकर चल।
चेतन कर ले विचार,चेतन कर ले विचार,
अग्नि और पेट्रोल मिलनसार,भयंकर विषय दोष का बोझ,
मिलते विषयी भीषण झाल,आलोचना करके उतार,
इसलिए चेतकर चल।इसलिए चेतकर चल।
चेतन कर ले विचार,चेतन कर ले विचार,
विषय है जलानेवाला,दृष्टि आकर्षित हो जहाँ पलभर,
निर्विषयी दादा जैसा बननेवाला,बीज पड़े होते ही तम्याकार,
इसलिए चेतकर चल।इसलिए चेतकर चल।
चेतन कर ले विचार,चेतन कर ले विचार,
शील का ग्रही ले अलंकार,बीज दो पत्तियों से फूटनार,
कल्याणी हेतु आकर्षनार,उखेड़ तत्क्षण दूर फेंकनार,
इसलिए चेतकर चल।इसलिए चेतकर चल।
चेतन कर ले विचार,चेतन कर ले विचार,
श्री विज्ञन से विषय जीतनार,दो पत्तियाँ फिर तेरी हार,
दादापुत्र बनो आप होनहार,सूक्ष्म में वीर्य स्वल्पन थनार,
इसलिए चेतकर चल।इसलिए चेतकर चल।
चेतन कर ले विचार,चेतन कर ले विचार,
स्पर्श दोष जहरीला अपार,दृष्टि से सूक्ष्म गलन थनार,
चेत नहीं तो तू फिसलनार,स्थूल में फिर न कोई रोकनार,
इसलिए चेतकर चल।इसलिए चेतकर चल।

46