भारतकोश
समझ से प्राप्त ब्रह्मचर्य

समझ से प्राप्त ब्रह्मचर्य

Samaj Se Prapt Brahmacharya

दादा भगवान द्वारा

स्रोत: दादा भगवान आराधना ट्रस्ट, 'दादा दर्शन', उस्मानपुरा, अहमदाबाद · दादा भगवान आराधना ट्रस्ट · 2005 (उद्गम)

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चेतन कर ले विचार, चेतन कर ले विचार, उखाड़ कॉपल तत्वार, विषयों चित् उपचार, अटके स्वल्पन था होशियार, निदिध्यासन एक ही सार, इसलिए चेतकर चल। इसलिए चेतकर चल।

चेतन कर ले विचार, चेतन कर ले विचार, विषय विचारे तन्मयाकार, बुद्धि से माना सुखसार, मंथन से वीर्य स्वल्पनार, विषय में कहाँ सुख तलभार? इसलिए चेतकर चल। इसलिए चेतकर चल।

चेतन कर ले विचार, चेतन कर ले विचार, मन कमजोर पड़े फिर भी मत हार, ब्रह्मचर्य का क्या आधार? दादाई कृपा अपरंपार, समझ से या अहंकार? इसलिए चेतकर चल। इसलिए चेतकर चल।

चेतन कर ले विचार, चेतन कर ले विचार, चित्त से खींचे फोटो बार-बार, वीर्य है पुद्गलसार, प्रतिक्रमण करके धोना कोटि बार, वह जीतने से प्राप्त समयसार, इसलिए चेतकर चल। इसलिए चेतकर चल।

चेतन कर ले विचार, चेतन कर ले विचार, चित्त को बिखरने मत देना, खुद जैसा जग करनार, आत्म ऐश्वर्य लूटनार, कैसे चले ध्येय तोड़नार, इसलिए चेतकर चल। इसलिए चेतकर चल।

चेतन कर ले विचार, चेतन कर ले विचार, चित्त का ऐसा है धिरधार, अखंड ब्रह्मचर्य की धार, एक बार टिके, वहीं जनार, मर जाना, लेकिन न चुकनार, इसलिए चेतकर चल। इसलिए चेतकर चल।

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