समझ से प्राप्त ब्रह्मचर्य
Samaj Se Prapt Brahmacharya
दादा भगवान द्वारा
स्रोत: दादा भगवान आराधना ट्रस्ट, 'दादा दर्शन', उस्मानपुरा, अहमदाबाद · दादा भगवान आराधना ट्रस्ट · 2005 (उद्गम)
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खंड : १ | | ---|---|--- विषय का स्वरूप, ज्ञानी की दृष्टि से | वासना, वस्तु नहीं, लेकिन रस ज्ञानी ही छुड़वाते हैं, वासना... विषय और कथा की भेदरेखा | ३९ ४० ४१
[ १ ]
[ ३ ]
विश्लेषण, विषय के स्वरूप का | माहात्म्य ब्रह्मचर्य का | ---|---|--- कीचड़ में टंडक का मजा | १ विषय की कीमत कितनी? | ४३ इस जहर को जहर जाना? | ३ विषय से जर्जरित हुए जीवन | ४३ परवशताएँ कैसे पुसाए? | ४ ब्रह्मचर्य पालन करने की सीढ़ियाँ | ४४ शादी करने के परिणाम तो देखो | ६ व्रत के परिणाम | ४५ पूरी दुनिया की है वह जूटन | ८ आज्ञासहित व्रत ही सही | ४६ सुख के साधन या अशुचित् का... | १० ब्रह्मचर्य तो कैसा होना चाहिए? | ४७ सच्चा आम का भोग, विषय... | १२ अभिप्राय बदलते ही निकलना... | ५१ सभी इन्द्रियों ने निंदा की... | १३ गजब के वे ब्रह्मचारी | ५१ बुद्धि से सोचा है विषय... | १५ | निरा गंदगी दिखे विषय में | १६ 'शादी नहीं करने' के निश्चयवालों | खरा सुख किस में? | के लिए राह | चल रहे हैं कहाँ? दिशा... | १८ | समझो ब्रह्मचर्य की कमाई | १९ | किफायत करो वीर्य और... | २१ किस समझ से विषय में से छूटा जा सकता है? | अक्रम विज्ञान प्राप्ति करवाए... | २३ शादी नहीं करने के निश्चयवाले... | ५३ इतना आवश्यक है, ब्रह्मचर्य... | २३ समझकर दाखिल होना इसमें | ५५ ज्ञान कितने अधिक रहता है,... | २५ बार-बार करना निश्चय दृढ़ | ५७ शरीर का राजा कौन? | २६ हे विषय! अब तेरे पक्ष में नहीं | ५८
[ २ ]
विकारों से विमुक्त की राह | | ---|---|--- विकारों को हटाना है? | २९ आँखें गड़ाएँगे तो दृष्टि... | ६३ ब्रह्मचर्य, प्रोजेक्ट का परिणाम | ३० प्रतिक्रमण के बाद, दंड... | ६५ उसके हेतु पर आधारित है | ३२ देखना, सामान्य भाव से | ६७ नहीं समझा जगत् ने, स्वरूप... | ३३ उस मिठास का पृथक्करण... | ६८ अज्ञान की गलतियों की सजा... | ३४ फिर भी आकर्षण क्यों? | ७० विषय का शौक, बढ़ाए विषय | ३५ राजा जीतने से, जीतेंगे पूरा राज | ७१ नहीं रोकना चाहिए मन को | ३६ टले ज्ञान और ध्यान... | ७४
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