समझ से प्राप्त ब्रह्मचर्य
Samaj Se Prapt Brahmacharya
दादा भगवान द्वारा
स्रोत: दादा भगवान आराधना ट्रस्ट, 'दादा दर्शन', उस्मानपुरा, अहमदाबाद · दादा भगवान आराधना ट्रस्ट · 2005 (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ें| लिंग जारी, उसका जोखिम | ७६ | जुदापन से जीत सकते हैं | १३५ |
|---|---|---|---|
| हार-जीत, विषय की या... | ७७ | सत्संग में भी सतर्क रहना है | १३८ |
| उसके सेवन से पात्रता | ७८ | मन की पोलों के सामने... | १३९ |
| मजबूरी से पाशवता | ८१ | बुद्धि की वकालत, बिना फौस... | १४५ |
[ २ ]
दृष्टि उखड़े, 'श्री विजन' से
'रेसमी चार' के पीछे
अदभुत प्रयोग, श्री विजन का
खरा ब्रह्मचर्य, जागृतिपूर्वक का
उपयोग जागृति से, टलता है मोह...
मोह राजा का अंतिम व्यूह
विषय में 'छिपी हुई रूचि'...
[ ३ ]
दृढ़ निश्चय पहुँचाए पार
जो कभी न डगमगाए, वही...
पकड़े रखे निश्चय को ठेठ तक...
समझो निश्चय के स्वरूप को...
निश्चय के परिपोषक
इतना ही सँभाल लेना जरा
कहीं पोल को पोषण तो नहीं...
नहीं चल सकता अपवाद...
पुरुषार्थ ही नहीं, लेकिन पराक्रम...
निश्चय मांगे सिन्सियारिटी
'रिज पॉइन्ट' पर रहे जोखिम...
दृढ़ निश्चयी पहुँच सकते हैं
अधूरी समझ, वहाँ निश्चय कच्चा
क्यों गाड़ियों से नहीं टकराता?
जहाँ चोर नीयत, वहाँ नहीं हैं...
विषय के विष की परख क्यों...
'उदय' की परिभाषा तो समझो
पद्व निश्चय को कैसे अंतराय?
[ ४ ]
विषय विचार परेशान करें तब...
वह तो है भरा हुआ माल
जुदापन से जीत सकते हैं
सत्संग में भी सतर्क रहना है
मन की पोलों के सामने...
बुद्धि की वकालत, बिना फौस...
बढ़ता है विषय की लिंग से...
कला से काम निकालो
[ ५ ]
नहीं चलना चाहिए, मन के कहे अनुसार
ज्ञान से करो स्वच्छ, मन को
वना मन हो जाए ढीला
विरोधी के पक्षकार?
मन चलाए, मंडप तक...
ध्येय का ही निश्चय
सामायिक में चलन, मन का
ध्येय अनुसार चलाओ...
भले ही शोर मचाएँ
नहीं चलेगा बेवरिग माइन्ड...
जहाँ सिद्धांत है ब्रह्मचर्य का...
चलो, सिद्धांत के अनुसार
निश्चय, ज्ञान और मन के
आपत्तियों की पात्रता
[ ६ ]
'खुद' अपने आपको को डाँटना
खुद को डाँटकर सुधारो
पूरा करो प्रकृति को पटाकर
[ ७ ]
पछतावे सहित प्रतिक्रमण
प्रत्यक्ष आलोचना से, नकद...
जहाँ इन्टेरेस्ट, वहाँ करो...
विषय से संबंधित सामायिक...
विषयों में सुखबुद्धि किसे?
हे गॉलों! हम नहीं या तुम...
विषय बीज निर्मूल शुद्ध...
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