समझ से प्राप्त ब्रह्मचर्य
Samaj Se Prapt Brahmacharya
दादा भगवान द्वारा
स्रोत: दादा भगवान आराधना ट्रस्ट, 'दादा दर्शन', उस्मानपुरा, अहमदाबाद · दादा भगवान आराधना ट्रस्ट · 2005 (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ें[ ८ ]
स्पर्श सुख की भामक मान्यता देखते ही जुगुप्सा १९२ रोंग बिलीफें, रूट कॉज में १९३ वह आवाज, मन की ही १९४ स्पर्श सुख के जोखिम १९६ स्त्री का स्पर्श लगे विष समान १९७ दोनों स्पर्शों के असर में भिन्नता २०० आकर्षण, वह है मोह २०३ जहाँ आकर्षण है, वहाँ... २०५ नियम आकर्षण - विकर्षण के २०८ एक बार भोगा कि गया २१० मुक्त दशा का थर्मामीटर २१२ भटकती वृत्तियाँ चित की २१३ चित की पकड़, छूटती... २१४
[ ९ ]
'फाइल' के सामने सख्ती विकारी दृष्टि के सामने ढाल २१६ विकारी चंचलता २१८ फाइल बन गई, वहाँ... २१८ सामने 'फाइल' आए, तब... २२० लकड़ी की पुतली अच्छी २२१ अग्नि और 'फाइल' एक से २२२ काटो सख्ती से 'उसे' २२३ वहाँ है चोर नीयत २२५ सखा, इस तरह हो सकते हैं २२७ तोड़ा जा सकता है लफड़ा... २२८ अपना बनाया कहकर डियर... २३०
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विषयी आचरण? तो डिसमिस यहाँ किए हुए पाप से मिले... २३३ नहीं शोभा देता वह २३४ फिसलना सहज, यदि एक... २३५ न हो संग संयोगी २३५
वहाँ पर दादा की मौन सख्ती २३८ आपत्तियों के लिए दफाएँ २४०
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सेफ साइड तक की बाड़
आवश्यकताएँ, ब्रह्मचर्य के... २४३ संग, कुसंग के परिणाम २४४ लश्कर तैयार करके उतरो... २४५ विषयी वातावरण से फैला... २४८ नहीं सुननी चाहिए विषयी... २४९ समभावियों का समूह २५० संगबल की सहायता... २५१
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तितिक्षा के तप से गढ़ो मन-देह
सीखो पाठ तितिक्षा के २५४ विकसित होता है मनोबल... २५७ उपवास-उणोदरी मात्र... २५९ ज्ञानियों ने नवाजा है उणोदरी... २६१ आहार जागृति से रक्षा करना... २६३ आहार में घी-शक्कर करवाते... २६४ नहाना भी है, निमंत्रण... २६६ जीना है, ध्येय अनुसार २६८ कंदमूल पोषण दें विषय को २६९
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न हो असार, पुद्गलसार
पुद्गलसार है, ब्रह्मचर्य २७१ अहो, अहो! उन आत्मवीर्यवालों... २७३ बरते वीर्य, जहाँ जहाँ रुचि २७४ उपाय करना, स्वप्नदोष टालने... २७५ वीर्यशक्ति का ऊर्ध्वगमन कब? २७७ जोखिम, हृष्ट-पुष्ट शरीर के २७९ निरोगी से भागें विषय २८२ ज्ञानी की सूक्ष्म बातें २८५ उल्टी हो गई तो क्या मर... २८९ विचार : मंथन : स्खलन २९१
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