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समझ से प्राप्त ब्रह्मचर्य

Samaj Se Prapt Brahmacharya

दादा भगवान द्वारा

स्रोत: दादा भगवान आराधना ट्रस्ट, 'दादा दर्शन', उस्मानपुरा, अहमदाबाद · दादा भगवान आराधना ट्रस्ट · 2005 (उद्गम)

DevanagariHindipublished482 पृष्ठ

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समझ से प्राप्त ब्रह्मचर्य (पूर्)

बोलने से तो बुद्धि इमोशनल हो जाती है। यों ही उनका चारित्र देखने से, उस मूर्ति को देखने से ही सभी भावों का शमन हो जाता है यानी कि उन्हें तो केवल खुद ही उस रूप हो जाने जैसा है। 'ज्ञानीपुरुष' के पास रहकर उस रूप होना है। ऐसी पाँच ही लड़कियाँ तैयार हो जाएँ तो कितने ही लोगों का वे कल्याण कर सकेंगी! बिल्कुल निर्मल बन जाना चाहिए और 'ज्ञानीपुरुष' के पास निर्मल हो सकते हैं और निर्मल होनेवाले हैं।

मूल गुजराती शब्दों के समानार्थी शब्द

हूँफ़ : अवलंबन, सलामती

निर्जरा : आत्म प्रदेश में से कर्मों का अलग होना

गलन : डिस्चार्ज होना, खाली होना

पुद्गल : जो पूर्ण और गलन होता है

गलगलिया : वृत्तियों को गुदगुदी होना, मन में मीठा लगना

निकाल : निपटारा

अटकण : जो बंधनरूप हो जाए, आगे नहीं बढ़ने दे

अरीसा : दर्पण

पूर्णण : चार्ज होना, भरना

उणोदरी : जितनी भूख लगे उससे आधा भोजन खाना

तरंगें : शेखचिल्ली जैसी कल्पनाएँ

उपाधि : बाहर से आनेवाला दुःख

निकाल : निपटारा

अणहक्क : बिना हक का, अवैध

भोगवटा : सुख या दुःख का असर

ऊपरी : बाँस, वरिष्ठ मालिक

तरछोड़ : तिरस्कार सहित दुत्कारना

राजीपा : गुरुजनों की कृपा और प्रसन्नता

चोविहार : सूर्यास्त से पहले भोजन करना

आश्रव : कर्म में उदय की शुरुआत, उदय कर्म में तन्मयाकार होना

आर्याबिल : जैनों में किया जानेवाला व्रत, जब भोजन में एक ही प्रकार का धान खाया जाता है

आड़ाई : अहंकार का टेढ़ापन

क्षपक : कर्मों का क्षय करनेवाला

दादा भगवान फाउन्डेशन के द्वारा प्रकाशित पुस्तकें

१. ज्ञानी पुरुष की पहचान २. सर्व दुःखों से मुक्ति ३. कर्म का सिद्धांत ४. आत्मबोध ५. मैं कौन हूँ ? ६. वर्तमान तीर्थंकर श्री सीमंधर स्वामी ७. भुगते उसी की भूल ८. एडजस्ट एवरीव्हेयर ९. टकराव टालिए १०. हुआ सो न्याय ११. चिंता १२. क्रोध १३. प्रतिक्रमण १४. दादा भगवान कौन ? १५. पैसों का व्यवहार १६. अंतःकरण का स्वरूप १७. जगत कर्ता कौन ? १८. त्रिमंत्र १९. भावना से सुधरे जन्मोंजन्म २०. माता-पिता और बच्चों का व्यवहार २१. प्रेम २२. समझ से प्राप्त ब्रह्मचर्य | २३. दान २४. मानव धर्म २५. सेवा-परोपकार २६. मृत्यु समय, पहले और पश्चात २७. निजदोष दर्शन से... निर्दोष २८. पति-पत्नी का दिव्य व्यवहार २९. क्लेश रहित जीवन ३०. गुरु-शिष्य ३१. अहिंसा ३२. सत्य-असत्य के रहस्य ३३. चमत्कार ३४. पाप-पुण्य ३५. वाणी, व्यवहार में... ३६. कर्म का विज्ञान ३७. आप्तवाणी - १ ३८. आप्तवाणी - २ ३९. आप्तवाणी - ३ ४०. आप्तवाणी - ४ ४१. आप्तवाणी - ५ ४२. आप्तवाणी - ६ ४३. आप्तवाणी - ८ ४४. समझ से प्राप्त ब्रह्मचर्य (पूर्वार्ध-उत्तरार्ध) ---|---

★ दादा भगवान फाउन्डेशन के द्वारा गुजराती भाषा में भी ५५ पुस्तकें प्रकाशित हुई हैं। वेबसाइट www.dadabhagwan.org पर से भी आप ये सभी पुस्तकें प्राप्त कर सकते हैं।

★ दादा भगवान फाउन्डेशन के द्वारा हर महीने हिन्दी, गुजराती तथा अंग्रेजी भाषा में “दादावाणी” मैगैज़ीन प्रकाशित होता है।

प्राप्तिस्थान

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राजकोट : त्रिभंदि, अहमदाबाद-राजकोट हाईवे, तरघड़िया चौकड़ी (सर्कल), पोस्ट : मालियासण, जि.-राजकोट. फोन : 9924343478

भुज : त्रिभंदि, हिल गार्डन के पीछे, एयरपोर्ट रोड. फोन : (02832) 290123

मोरबी : त्रिभंदि, मोरबी-नवलखी हाईवे, पो-जेपुर, ता.-मोरबी, जि.-राजकोट. फोन : (02822) 297097

सुरेन्द्रनगर : त्रिभंदि, सुरेन्द्रनगर-राजकोट हाईवे, लोकविद्यालय के पास, मुख्य रोड. फोन : 9737048322

गोधरा : त्रिभंदि, भांमैया गाँव, एफसीआई गोडाउन के सामने, गोधरा. (जि.-पंचमहाल). फोन : (02672) 262300

अहमदाबाद : दादा दर्शन, ५, ममतापार्क सोसाइटी, नवगुजरात कॉलेज के पीछे, उस्मानपुरा, अहमदाबाद-380014. फोन : (079) 27540408

वडोदरा : दादा मंदिर, १७, मामा की पोल-मुहल्ला, रावपुरा पुलिस स्टेशन के सामने, सलाटवाड़ा, वडोदरा. फोन : 9924343335

मुंबई : 9323528901 दिल्ली : 9810098564

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जयपुर : 9315408285 भोपाल : 9425024405

इन्दौर : 9039936173 जबलपुर : 9425160428

रायपुर : 9329644433 भिलाई : 9827481336

पटना : 7352723132 अमरावती : 9422915064

बंगलूर : 9590979099 हैदराबाद : 9989877786

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उसने जीत लिया जगत्!

अब्रह्मचर्य के विचार आएँ लेकिन अगर ब्रह्मचर्य की शक्तियाँ माँगता रहे, तो वह बहुत बड़ी बात है। ब्रह्मचर्य की शक्तियाँ माँगते रहने से किसी को दो साल में, किसी को पाँच साल में, लेकिन बैसा उदय आ जाता है। जिसने अब्रह्मचर्य जीत लिया, उसने पूरा जगत् जीत लिया। ब्रह्मचर्यवाले पर तो शासन देवी-देवता बहुत खुश रहते हैं!

-दादाश्री

dadabagwan.org

ISBN 978-81-81128-46-3

9 788158 128663 >

Printed in India

Price ₹ 100