सामवेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Samaveda Samhita with Hindi Translation
डा. रेखा व्यास द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 103, कुल 310 में से
संदर्भ में पढ़ेंसे वश में कर के कलशों में भरा जाता है. (५) असृक्षत प्र वाजिनो गव्या सोमासो अश्वया. शुक्रासो वीरयाशवः.. (६) हे सोम! आप बलवान, बल देने वाले एवं वेगवान हैं. यजमान ने गायों, घोड़ों और पुत्रों को पाने की इच्छा से आप को निचोड़ा है. (६) पवस्व देव आयुषगिन्द्रं गच्छतु ते मदः. वायुमा रोह धर्मणा.. (७) हे सोम! आप प्रकाशमान हैं. आप छनने के लिए पात्र में पधारिए. आप का आनंददायी रस इंद्र को पहुंचे. आप धारा के रूप में वायु को प्राप्त कीजिए. (७) पवमानो अजीजनद्दिवश्चित्रं न तन्यतुम्. ज्योतिर्वैश्वानरं बृहत्.. (८) सोम पवित्र हुए. उस के बाद उन्होंने स्वर्गलोक से सब को प्रकाशित कर सकने वाली ज्योति (वैश्वानर) को बिजली की तरह चमकाया. (८) परि स्वानास इन्दवो मदाय बर्हणा गिरा. मधो अर्षन्ति धारया.. (९) सोमरस निचोड़ने के बाद पवित्र प्रार्थनाओं से यजमान स्तुति करते हुए धारा में बांध कर उसे छानते हैं. (९) परि प्रासिष्यदत्कविः सिन्धोरूर्मवधि श्रितः. कारुं बिभ्रत्पुरुस्पृहम्.. (१०) सोमरस बुद्धि बढ़ाने वाला है. अनेक लोगों द्वारा चाहा गया है. लहरों की तरह जल में मिलता है. यह यजमानों की इच्छा से पात्र में छनछन कर चू रहा है. (१०) तीसरा खंड उपो षु जातमप्तुरं गोभिर्भङ्गं परिष्कृतम्. इन्दुं देवा अयासिषुः.. (१) सोमरस को पानी, गाय का दूध और घी मिला कर अच्छी तरह तैयार किया गया है. यह शत्रुनाशक है. यह उत्तम सोमरस देवताओं तक पहुंचे. (१) पुनानो अक्रमीदभि विश्वा मृधो विचर्षणिः. शुम्भन्ति विप्रं धीतिभिः.. (२) सोमरस बुद्धि बढ़ाने वाला, पवित्र व सभी शत्रुओं पर आक्रमण करता है. ज्ञानी उस सोम की स्तोत्रों से शोभा बढ़ाते हैं. (२) आविशन्कलश ॐ सुतो विश्वा अर्षन्नभि श्रियः. इन्दुरिन्द्राय धीयते.. (३) शुद्ध सोमरस निकाल लिया गया है. यह कलश में भरा जा रहा है. यह इच्छा पूर्ति करने वाला सोमरस इंद्र के लिए भेंट किया जाता है. (३) असर्जि रथ्यो यथा पवित्रे चम्वोः सुतः. कार्ष्मन्वाजी न्यक्रमोत्.. (४) ebook converter DEMO Watermarks*