भारतकोश
सामवेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

सामवेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Samaveda Samhita with Hindi Translation

डा. रेखा व्यास द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished310 पृष्ठ

पृष्ठ 104, कुल 310 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 104

जैसे रथ का घोड़ा छोड़ा जाता है, वैसे ही सोम को दो फलकों से निचोड़ कर छानने वाले बरतन में छोड़ा जाता है. घोड़े की तरह वेगवान सोमरस यज्ञ रूपी युद्ध में जाता है. (४) प्र यद्गावो न भूर्णयस्त्वेषा अयासो अक्रमुः. घ्नन्तः कृष्णामप त्वचम्.. (५) सोमरस वेगवान और प्रकाशवान है. वह अपनी काली छाल दूर कर के उसी तरह यज्ञ में जाता है, जिस तरह गाएं वेग से अपने बाड़े में जाती हैं. (५) अपघ्नन्पवसे मृधः क्रतुवित्सोम मत्सरः. नुदस्वादेवयुं जनम्.. (६) सोमरस मदमस्त करने वाला, यज्ञ के विधिविधानों (कर्मकांडों) को जानने वाला और शत्रुओं का नाशक है. सोम देवताओं को न चाहने वाले राक्षसों को दूर करने वाला है. (६) अया पवस्व धारया यया सूर्यमरोचयः. हिन्वानो मानुषीरपः.. (७) हे सोम! आप मनुष्यों का हित करने वाले व जल को बरसात के लिए प्रेरणा देने वाले हैं. जिस धारा से आप सूर्य को प्रकाशित करते हैं, उसी धारा से आप इस पात्र में प्रवेश कीजिए. (७) स पवस्व य आविथेन्द्रं वृत्राय हन्तवे. वव्रीवा ँ सं महीरपः.. (८) हे सोम! आप जल रोकने वाले वृत्रासुर को मारने के लिए इंद्र का उत्साह बढ़ाइए. आप अपनी धाराओं से कलश को पूर्ण कर दीजिए. (८) अया वीती परि स्रव यस्त इन्दो मदेष्वा. अवाहन्नवतीर्नव.. (९) हे सोम! इंद्र के भोग के लिए आप कलश में छनिए. सोमरस शंबर राक्षस की निन्यानवे नगरियों को तोड़ने का इंद्र को सामर्थ्य प्रदान करता है. (९) परि द्युक्ष ँ सनद्रयिं भरद्वाजं नो अन्धसा. स्वानो अर्ष पवित्र आ.. (१०) हे सोम! आप प्रकाशित और देने योग्य धन हमें दीजिए. आप हमें बल और अन्न प्रदान कीजिए. आप का पवित्र रस छनने के बाद मटकों में बना रहे (स्थिरता से भरा रहे). (१०) चौथा खंड अचिक्रदद्वृषा हरिर्महान्मित्रो न दर्शतः. स ँ सूर्येण दिद्युते.. (१) सोम कामना पूरी करते हैं. वे हरे और हमारे महान मित्र हैं. वे सूर्य के समान प्रकाशित होते हैं. निचोड़ते समय वे शब्द करते हैं. (१) आ ते दक्षं मयोभुवं वह्निमद्या वृणीमहे. पान्तमा पुरुस्पृहम्.. (२) हे सोम! आप बलदाता, सुखदाता, धनदाता, शत्रुनाशक व अनेक लोगों द्वारा चाहे जाते हैं. आज यज्ञ में हम आप के उस बल को याद करते हैं. (२) ebook converter DEMO Watermarks*