भारतकोश
सामवेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

सामवेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Samaveda Samhita with Hindi Translation

डा. रेखा व्यास द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished310 पृष्ठ

पृष्ठ 106, कुल 310 में से

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पृष्ठ 106

अयं विचर्षणिर्हितः पवमानः स चेतति. हिन्वान आप्यं बृहत्.. (१२) हे सोम! आप विशेष बुद्धि देने वाले हैं. छान कर साफ बरतन में भरा जल मिला हुआ सोमरस बहुत आनंद व अन्न देता है. बहुत लोग इस के गुण गाते हैं. (१२) प्र न इन्दो महे तु न ऊर्मिं न बिभ्रदर्षसि. अभि देवाँ अयास्यः.. (१३) हे सोम! बहुत धन पाने के लिए हम मटकों में आप को छानते हैं. अयास्य ऋषि देव पूजन के लिए आप की लहरों को धारण करते हुए गाते हैं. (१३) अपघ्नन्पवते मृधो ऽ प सोमो अराव्णः. गच्छन्निन्द्रस्य निष्कृतम्.. (१४) हे सोम! आप शत्रु व धन न देने वालों के भी नाशक हैं. सोम इंद्र के पास जाने के लिए छनछन कर टपक रहे हैं. (१४) पांचवां खंड पुनानः सोम धारयापो वसानो अर्षसि. आ रत्नधा योनिममृतस्य सीदस्युत्सो देवो हिरण्ययः.. (१) हे सोम! आप पवित्र करने वाले व पानी के साथ मिल कर जलधार के रूप में आप मटकों में प्रवेश करते हैं. आप रत्न आदि कीमती धन देने वाले और यज्ञ मंडप में विराजमान होते हैं. आप प्रकाशमान, देवताओं का हित साधने वाले, सुंदर, चमकीले व बहने वाले हैं. (१) परीतो षिञ्चता सुत ॐ सोमो य उत्तम ॐ हविः. दधन्वाँ यो नर्यो अप्स्वा ३ न्तरा सुषाव सोममद्रिभिः.. (२) हे सोम! आप देवताओं के लिए सर्वश्रेष्ठ हवि हैं. आप मनुष्यों का हित साधने वाले हैं. आप को पुरोहित पत्थरों के द्वारा निचोड़ते हैं. हे यजमानो! आप इस सोमरस में जल मिलाइए. (२) आ सोम स्वानो अद्रिभिस्तिरो वाराण्यव्यया. जनो न पुरि चम्वोर्विशद्धरिः सदो वनेषु दध्रिषे.. (३) हे सोम! पत्थरों से कूट कर आप का रस निकाल लिया जाता है. उस के बाद भेड़ों के बालों से बनी छलनी से छाना जाता है. हरे रंग वाला सोमरस द्रोणकलश में ऐसे प्रवेश करता है, जैसे नगर में पुरुष. सोमरस लकड़ी के बरतनों में विराजमान रहता है. (३) प्र सोम देववीतये सिन्धुर्न पिप्ये अर्णसा. अ ॐ शोः पयसा मदिरो न जागृविरच्छा कोशं मधुश्रुतम्.. (४) हे सोम! देवताओं के पीने के लिए आप को सिंधु के समान जल के साथ मिलाया जाता ebook converter DEMO Watermarks*