सामवेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Samaveda Samhita with Hindi Translation
डा. रेखा व्यास द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 117, कुल 310 में से
संदर्भ में पढ़ेंपवित्र सोमरस छनछन कर घड़े में टपकता और अपना मीठा रस द्रोणकलश में पहुंचाता है. सात छंदों (पदों) वाली ऋषियों की वाणी सोम की स्तुति करती है. (१२) ग्यारहवां खंड पवस्व मधुमत्तम इन्द्राय सोम क्रतुवित्तमो मदः. महि द्युक्षतमो मदः.. (१) हे सोम! आप अत्यंत मधुर हैं. आप यज्ञ के बारे में सब कुछ जानने वाले हैं. आप सर्वोत्तम, प्रकाशमान व तेजस्वी हैं. आप इंद्र को आनंद देने के लिए पवित्र होइए. (१) अभि द्युम्नं बृहद्यश इषस्पते दीदिहि देव देवयुम्. वि कोशं मध्यमं युव.. (२) हे सोम! आप अन्न के स्वामी, प्रकाशमान, स्तुति व देवताओं के पीने (पाने) योग्य हैं. आप हमें यश और बल दीजिए. आप द्रोणकलशों को लबालब भर दीजिए. (२) आ सोता परि षिञ्चताश्वं न स्तोममप्तुर ꣳ रजस्तुरम्. वनप्रक्षमूदप्रुतम्.. (३) हे यजमानो! सोम घोड़े जैसे वेगवान व स्तुति करने योग्य हैं. वे पानी की तरह प्रवहमान (बहने वाले) हैं तथा प्रकाश की किरणों की तरह कहीं भी शीघ्र पहुंचने वाले हैं. आप सोमरस को निचोड़िए और उसी में जल मिलाइए. उस के बाद उसे गो दूध से सींचिए. (३) एतमु त्यं मदच्युत ꣳ सहस्रधारं वृषभं दिवोदुहम्. विश्वा वसूनि बिभ्रतम्.. (४) सोमरस प्रसन्नतादायी है, कई धाराओं से द्रोणकलश में झरता है, शक्ति बढ़ाने वाला है तथा सभी धनों का स्वामी है. विद्वान् यजमान सोमरस निचोड़ते हैं. (४) स सुन्वे यो वसूनां यो रायामानेता य इडानाम्. सोमो यः सुक्षितीनाम्.. (५) सोम धन, दूध आदि रस व शक्ति के स्वामी हैं. ये श्रेष्ठ संतान देने वाले हैं. यजमान श्रेष्ठ सोमरस निचोड़ते हैं. (५) त्वं ह्या ३ ङ्ग दैव्यं पवमान जनिमानि द्युमत्तमः अमृतत्वाय घोषयन्.. (६) हे सोम! आप पवित्र, पूजनीय व प्रकाशवान हैं. आप देवताओं के बारे में सब कुछ जानते हैं. आप उन की अमरता की घोषणा करते हैं. आप यजमान से उन की स्तुति कराते हैं. (६) एष स्य धारया सुतो ऽ व्या वारेभिः पवते मदिन्तमः. क्रीळन्नूर्मिरपामिव.. (७) सोम अत्यंत आनंददायी हैं. ये जल की लहरों की तरह खेलतेकूदते हैं. सोमरस को भेड़ के बालों से बनी छलनी से कलश में धार बना कर छाना जाता है. (७) य उस्रिया अपि या अन्तरश्मनि निर्गा अकृन्तदोजसा. अभि व्रजं तत्निषे गव्यमश्व्यं वर्मीव धृष्पवा रुज.. (८) ebook converter DEMO Watermarks*