भारतकोश
सामवेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

सामवेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Samaveda Samhita with Hindi Translation

डा. रेखा व्यास द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished310 पृष्ठ

पृष्ठ 116, कुल 310 में से

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यज्ञ के अन्य साधनों से सोम को सजाइए. (३) तं वः सखायो मदाय पुनानमभि गायत. शिशुं न हव्यैः स्वदयन्त गूर्तिभिः.. (४) हे मित्र यजमानो! आप प्रसन्नता बढ़ाने के लिए सोम की स्तुति कीजिए. आप छानते हुए सोम की स्तुति कीजिए. आप बालक को सजाने की तरह हवियों से इन्हें सजाइए. (४) प्राणा शिशुर्महीना २४ हिन्वन्मृतस्य दीधितिम्. विश्वा परि प्रिया भुवदध द्विता.. (५) सोम आदरणीय जल के पुत्र हैं. ये यज्ञ को प्रकाशित और परिपूर्ण करने वाले हैं. इन का रस सभी हवियों में रहता है. ये स्वर्गलोक और पृथ्वीलोक दोनों में रहते हैं. (५) पवस्व देववीतय इन्दो धाराभिरोजसा. आ कलशं मधुमान्त्सोम नः सदः.. (६) हे सोम! देवताओं के पीने के लिए आप जल्दी से धाराधार हो कर छनिए. आप मदकारी हैं. आप हमारे कलश में विराजिए. (६) सोमः पुनान ऊर्मिणाव्यं वारं वि धावति. अग्रे वाचः पवमानः कनिक्रदत्.. (७) सोमरस पवित्र और छना हुआ है. छनने में आवाज करता हुआ वह भेड़ के बालों से बनी छलनी से छनता जाता है. (७) प्र पुनानाय वेधसे सोमाय वच उच्यते. भृतिं न भरा मतिभिर्जुजोषते.. (८) पवित्र तथा कर्म करने वाले सोम के लिए प्रार्थनाएं की जाती हैं. सेवक की सेवा से जैसे हम प्रसन्न हो जाते हैं, वैसे ही विशेष प्रार्थनाओं से हम उन को प्रसन्न करें. (८) गोमन्न इन्दो अश्ववत्सुतः सुदक्ष धन्विव. शुचिं च वर्णमधि गोषु धारय.. (९) हे सोम! आप शक्तिमान हैं. रस निचोड़ने के बाद आप हमें गोधन और अश्व धन दीजिए, फिर गाय के दूध में मिल कर आप सफेद रंग वाले हो जाइए. हम सब तरह से आप की स्तुति करते हैं. (९) अस्मभ्यं त्वा वसुविदमभि वाणीरनूषत. गोभिष्टे वर्णमभि वासयामसि.. (१०) हे सोम! आप धनदाता हैं. हमें धन दीजिए. हम आप की स्तुति करते हैं. हम आप के रस को गोरस में मिलाते हैं. (१०) पवते हर्यतो हरिरति ह्ररा २४ सि र २४ ह्रा. अभ्यर्ष स्तोतृभ्यो वीरवद्यशः.. (११) हे सोम! आप मनोहर व हरे रंग के हैं. आप छनते जाइए. न छनने वाले भाग को छलनी में रहने दीजिए. आप हम उपासकों को यशस्वी पुत्र दीजिए. (११) परि कोशं मधुश्चुत २४ सोमः पुनानो अर्षति. अभि वाणीर्ऋषीणा २४ सप्ता नूषत.. (१२) ebook converter DEMO Watermarks*

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