भारतकोश
सामवेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

सामवेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Samaveda Samhita with Hindi Translation

डा. रेखा व्यास द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished310 पृष्ठ

पृष्ठ 115, कुल 310 में से

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योग्य है. गाय का दूध मिलाने और छानने के समय यह आवाज करता है. भेड़ों के बालों से बनी छलनी से छान कर इसे साफ किया जाता है. यह जलमय है. श्येन पक्षी के समान यह घड़े में स्थित रहता है. (९) प्र देवमच्छा मधुमन्त इन्दवो ऽ सिष्यदन्त गाव आ न धेनवः. बर्हिषदो वचनावन्त ऊधभिः परिस्रुतमुसिया निर्णिजं धीरे.. (१०) सोमरस मीठा है. इसे देवताओं के लिए तैयार किया जाता है. दुधारू गाएं जैसे अपने बछड़ों के पास जाती हैं, वैसे ही सोमरस कलश में जाता है. यज्ञ मंडप में गाएं इंद्र के लिए अपने स्तनों से टपकने वाले दूध में सोमरस धारण करती हैं. (१०) अञ्जते व्यञ्जते समञ्जते क्रतु ꣹ रिहन्ति मध्वाभ्यञ्जते. सिन्धोरुच्छवासे पतयन्तमुक्षणं ꣹ हिरण्यपावाः पशुमप्सु गृभ्णते.. (११) यजमान सोमरस में गाय के दूध को एकमेक कर के मिलाते हैं. देवतागण सोमरस का आनंद लेते हैं. यजमान इस सोमरस में गाय का घी और शहद मिलाते हैं. नदी के जल में रहने वाले सोम को सोने से शुद्ध कर के चमकाया जाता है. (११) पवित्रं ते विततं ब्रह्मणस्पते प्रभुर्गात्राणि पर्येषि विश्वतः. अतप्ततनूर्न तदामो अश्नुते शृतास इदृहन्तः सं तदाशत.. (१२) हे सोम! आप ज्ञान के स्वामी हैं. आप अपने पवित्र अंगों से सर्वव्यापक व सामर्थ्यवान हैं. आप पीने वाले को बल (स्फूर्ति) देते हैं. जिस ने तप, व्रत आदि से अपने को नहीं तपाया, उस पर आप कृपा नहीं करते. तपाने या परिपक्व होने के बाद ही उपासक यजमान पर आप की कृपा होती है. (१२) दसवां खंड इन्द्रमच्छ सुता इमे वृषणं यन्तु हरयः. श्रुष्टे जातास इन्दवः स्वर्विदः.. (१) सोमरस बहुत जल्दी तैयार किया गया है. यह ज्ञान की बढ़ोतरी करने वाला और हरा है. यह शीघ्र ही इच्छा पूर्ण करने वाले शक्तिमान इंद्र के पास पहुंचे. (१) प्र धन्वा सोम जागृविरिन्द्रायेन्दो परि स्रव. द्युमन्त ꣹ शुष्ममा भर स्वर्विदम्.. (२) हे सोम! आप उत्साह और फुर्ती देने वाले हैं. आप इंद्र के पीने के लिए इस कलश में प्रवेश कीजिए. आप हमें प्रकाशवान और ज्ञानवान बनाइए. (२) सखाय आ नि षीदत पुनानाय प्र गायत. शिशुं न यज्ञैः परि भूषत श्रिये.. (३) हे यजमानो! आप हमारे मित्र हैं. आप आइए व बैठिए. आप सोम को छानते समय की जाने वाली स्तुति गाइए. जैसे बच्चे को आभूषणों से सजाया जाता है, वैसे ही आप हवि और ebook converter DEMO Watermarks*