सामवेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Samaveda Samhita with Hindi Translation
डा. रेखा व्यास द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 114, कुल 310 में से
संदर्भ में पढ़ेंजल बरसाने वाली व दुधारू गायों के समान आवाज करने वाली हैं. (३) प्रो अयासीदिन्दुरिन्द्रस्य निष्कृतं २४ सखा सख्युर्न प्र मिनाति सङ्गिरम्. मर्य इव युवतिभिः समर्पति सोमः कलशे शतयामना पथा.. (४) यह सोमरस इंद्र के पेट में पहुंचता है. मित्र की तरह सोम इंद्र को किसी भी प्रकार का कोई कष्ट नहीं देते. युवक जैसे युवतियों के साथ घुलमिल कर रहता है, वैसे ही सोमरस जल के साथ घुलमिल कर रहता है. वह छलनी के अनेक छेदों से छनछन कर मटके में जाता है. (४) धर्ता दिवः पवते कृत्व्यो रसो दक्षो देवानामनुमाद्यो नृभिः. हरिः सृजानो अत्यो न सत्वभिर्वृथा पाजा २४ सि कृणुषे नदीष्वा.. (५) सोमरस सब को धारण कर सकता है. यह कर्म करने वाला और देवताओं की शक्ति बढ़ाने वाला है. यह छनछन कर घड़े में प्रवेश करता है. शक्तिशाली यजमान इस को निचोड़ते हैं. यह शक्तिशाली घोड़े की तरह वेग से नदियों के जल में स्वयं को मिला लेता है. (५) वृषा मतीनां पवते विचक्षणः सोमो अह्नां प्रतरीतोषसां दिवः. प्राणा सिन्धूनाँ कलशाँ अचिक्रददिन्द्रस्य हार्द्याविशन्मनीषिभिः.. (६) सोम सब की इच्छा पूरी करने वाले, विशेष कृपा दृष्टि रखने वाले, उषा और सूर्य की शक्ति बढ़ाने वाले हैं. विद्वान् यजमान इसे छानते हैं. नदियों का जल मिला कर इसे तैयार किया गया है. इंद्र के पेट में पहुंचने के लिए यह शब्द करता हुआ घड़े में प्रवेश करता है. (६) त्रिरस्मै सप्त धेनवो दुदुहिरे सत्यामाशिरं परमे व्योमनि. चत्वार्यन्या भुवनानि निर्णिजे चारूणि चक्रे यदृतैरवर्धत.. (७) सोम श्रेष्ठ यज्ञ में निवास करने वाले हैं. इन के लिए इक्कीस गाएं नियमित रूप से शुद्ध दूध देती हैं. चारों लोकों के जल, शुद्ध दूध होने के लिए कल्याणकारी रूप से बहते हैं. (७) इन्द्राय सोम सुषुतः परि स्रवापामीवा भवतु रक्षसा सह. मा ते रसस्य मत्सत द्वयाविनो द्रविणस्वन्त इह सन्त्विन्दवः.. (८) हे सोम! भलीभांति आप का रस निकाला जाता है. आप को इंद्र के लिए तैयार किया गया है. रोग और राक्षस आप के पास न फटकें. जो पापी लोग झूठा और सच्चा दोनों तरह का व्यवहार करते हैं, उन पर आप की कृपा न हो. आप हमें इस यज्ञ में धन प्रदान कीजिए. (८) असावि सोमो अरुषो वृषा हरी राजेव दस्मो अभि गा अचिक्रदत्. पुनानो वारमत्येष्यव्ययं २४ श्येनो न योनिं घृतवन्तमासदत्.. (९) सोमरस प्रकाशमान, शक्तिवर्द्धक और हरा है. वह राजा के समान सुंदर और देखने ebook converter DEMO Watermarks*