भारतकोश
सामवेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

सामवेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Samaveda Samhita with Hindi Translation

डा. रेखा व्यास द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished310 पृष्ठ

पृष्ठ 113, कुल 310 में से

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पृष्ठ 113

शुक्रा वि यन्त्यसुराय निर्णिजे विपामग्रे महीयुवः.. (७) योद्धा जैसे धनुष पर डोरी चढ़ाते हैं, वैसे ही यजमान सोमरस को छानते हैं. सोम शत्रुओं को हराने वाले और पूजनीय हैं. गाय का दूध मिला कर सोमरस को और श्रेष्ठ बनाया जाता है. (७) परि त्य हर्यत हरिं बभ्रुं पुनन्ति वारेण. यो देवान्विश्वाँ इत्परि मदेन सह गच्छति.. (८) सोमरस हराभरा और सुंदर है. उसे भेड़ के बालों से बनी छलनी से छाना जाता है. यह आनंददायी गुणों वाला है. यह अपने इन्हीं गुणों के साथ इंद्र और अन्य देवों के पास जाता है. (८) प्र सुन्वानायान्धसो मर्तो न वष्ट तद्वचः. अप श्वानमराधस हता मखं न भृगवः.. (९) छाने जाने के समय सोम के वचन (ध्वनि को) विघ्न पैदा कर के संतोष पाने वाले लोग न सुनें. भृगु नामक ऋषि ने जैसे मख नामक राक्षस को यज्ञ स्थल से दूर हटा दिया था, वैसे ही यजमान यज्ञ स्थल के पास आने के इच्छुक कुत्तों को हटा दें. (९) नौवां खंड अभि प्रियाणि पवते चनोहितो नामानि यह्वो अधि येषु वर्धते. आ सूर्यस्य बृहतो बृहन्नधि रथं विश्वञ्चमरुहद्विचक्षणः.. (१) हे सोम! आप दिव्य दृष्टि वाले हैं. सूर्य का रथ सब जगह जा सकता है. आप उस रथ पर विराजमान होते हैं और सारे संसार को देखते हैं. आप प्रिय जल में मिलते हैं एवं अन्नों को बढ़ाते हैं. आप व्यापक होते हुए बहते हैं. (१) अचोदसो नो धन्वन्तिन्दवः प्र स्वानासो बृहद्दवेषु हरयः. वि चिदश्राना इषयो अरातयो ऽ र्यो नः सन्तु सनिषन्तु नो धियः.. (२) हे सोम! आप दूसरों से प्रेरित नहीं होते. आप का रस हरा है. आप को विधिवत निचोड़ा जाता है. आप हमारे यज्ञ में पधारिए. आप यज्ञ और यजमान के दुश्मन तथा दान न देने वाले लोगों को अन्न की इच्छा होने पर भी अन्न, धन मत दीजिए. हमारी प्रार्थनाएं जिनजिन देवताओं के लिए हैं, वे उनउन देवताओं तक पहुंचें. (२) एष प्र कोशे मधुमाँ अचिक्रददिन्द्रस्य वज्रो वपुषो वपुष्टमः. अभ्यू ३ त्स्य सुदुघा घृतश्चुतो वाश्रा अर्षन्ति पयसा च धेनवः.. (३) हे सोम! आप का रस इंद्र के वज्र की भांति बहुत ही बलवान और मीठा है. यह रस ध्वनि करता हुआ द्रोणकलश में प्रवेश करे. सोमरस की धाराएं फलों को मधुर बनाने वाली, ebook converter DEMO Watermarks*