भारतकोश
सामवेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

सामवेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Samaveda Samhita with Hindi Translation

डा. रेखा व्यास द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished310 पृष्ठ

पृष्ठ 112, कुल 310 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 112

आठवां खंड पुरोजिती वो अन्धसः सुताय मादयित्नवे. अप श्वानं श्रथिष्टन सस्नखायो दीर्घजिह्वयम्.. (१) हे यजमानो! आप के आगे आनंददायी सोमरस रखा हुआ है. लंबीलंबी जीभ वाले कुत्ते इस के पास जाना चाहते हैं. आप उन कुत्तों को दूर भगाओ. (१) अयं पूषा रयिर्भर्गः सोमः पुनानो अर्षति. पतिर्विश्वस्य भूमनो व्यख्यद्रोदसी उभे.. (२) सोमरस पोषक, पीने योग्य व शोभादायी है. वह छन कर बरतन में गिरता है. वह सभी प्राणियों का पालनहार है. वह स्वर्गलोक तथा पृथ्वीलोक दोनों को अपने प्रकाश से प्रकाशित करता है. (२) सुतासो मधुमत्तमाः सोमा इन्द्राय मन्दिनः. पवित्रवन्तो अक्षरन् देवान् गच्छन्तु वो मदाः.. (३) इंद्र के लिए मीठा और मादक सोमरस तैयार किया जाता है. हे सोम! आप का यह आनंददायी रस देवताओं तक अवश्य पहुंचे. (३) सोमाः पवन्त इन्दवो ऽ स्मभ्यं गातुवित्तमाः. मित्राः स्वाना अरेपसः स्वाध्यः स्वर्विदः.. (४) सोम सभी रास्तों को भलीभांति जानने वाले हैं. वे मित्रों के समान हैं. सोम आत्मज्ञाता, मन को पाप रहित करने वाले व उस को एकाग्र करने वाले हैं. उस को हमारे लिए छाना जाता है. (४) अभी नो वाजसातम रयिमर्ष शतस्पृहम्. इन्दो सहस्रभर्णसं तुविद्युम्नं विभासहम्.. (५) हे सोम! सैकड़ों लोग आप की प्रशंसा करते हैं. आप हजारों जीवों के पालनहार व बहुत अन्न, धन और प्रकाश वाले हैं. आप हमें बुद्धिशाली और बलशाली पुत्र प्रदान कीजिए. (५) अभी नवन्ते अद्रुहः प्रियमिन्द्रस्य काम्यम्. वत्सं न पूर्व आयुनि जात रिहन्ति मातरः.. (६) गाएं जैसे बछड़ों को चाटती हैं, वैसे ही जल सोमरस में मिलते हैं. वे किसी प्रकार का विद्रोह नहीं करते. वे इंद्र को चाहने वाले सोमरस में मिल जाते हैं. (६) आ हर्यताय धृष्णवे धनुष्टन्वन्ति पौंस्यम्. ebook converter DEMO Watermarks*