भारतकोश
सामवेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

सामवेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Samaveda Samhita with Hindi Translation

डा. रेखा व्यास द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished310 पृष्ठ

पृष्ठ 111, कुल 310 में से

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अधि यदस्मिन्वाजिनीव शुभः स्पर्धन्ते धियः सूरे न विशः. अपो वृणानः पवते कवीयान्व्रजं न पशुवर्धनाय मन्म.. (७) सोम को अपने किरण रूपी आभूषणों से सूर्य उसी तरह सजाते हैं, जिस तरह आभूषणों से घोड़े को सजाया जाता है. उसे निकालने में अंगुलियां एकदूसरे से होड़ करती हैं. जैसे ग्वाला गायों को पोसने के लिए गोशाला में ले जाता है, वैसे ही सोमरस को यजमान मटकों में ले जाते हैं. (७) इन्दुर्वाद्वी पवते गोन्योघा इन्द्रे सोमः सह इन्वन्मदाय. हन्ति रक्षो बाधते पर्यरातिं वरिवस्कृण्वन्वृजनस्य राजा.. (८) सोमरस इंद्र का बल बढ़ाने वाला, यजमानों को धन देने वाला व शक्ति में राजा है. ज्यादा आनंद के लिए इसे छाना जाता है. यह दुष्टों का दलन करता है. यह राक्षसों और शत्रुओं का नाश करने वाला है. (८) अया पवा पवस्वैना वसूनि माँ श्रुत्व इन्दो सरसि प्र धन्व. ब्रध्नश्चिद्यस्य वातो न जूतिं पुरुमेधाश्चित्तकवे नरं धात्.. (९) हे सोम! आप की धाराएं पवित्र हैं. आप हमें धन प्रदान करने की कृपा करें. जिस प्रकार सूर्य सृष्टि के मूलाधार हैं, वे वायु को बहाते हैं वैसे ही आप वसतीवरी नामक घड़े में बहिए. बुद्धिशाली इंद्र आप को प्राप्त करें और हम अच्छी संतान प्राप्त करें. (९) महत्तत्सोमो महिषश्चकारापां यद्गर्भो ऽ वृणीत देवान्. अदधादिन्द्रे पवमान ओजो ऽ जनयत्सूर्ये ज्योतिरिन्दुः.. (१०) सोम महान हैं. वे महान कार्य करने वाले हैं. वे गर्भ में जल धारण करते हैं. वे देवताओं को पालते हैं. वे इंद्र को बलशाली और सूर्य को तेजस्वी बनाते हैं. (१०) असर्जि वक्वा रथ्ये यथाजौ धिया मनोता प्रथमा मनीषा. दश स्वसारो अधि सानो अव्ये मृजन्ति वह्नि ॐ सदनेष्वच्छ.. (११) जिस प्रकार युद्धों में घोड़े भेजे जाते हैं, वैसे ही सोमरस में जल भेजा (मिलाया) जाता है. दसों अंगुलियां सोम को भेड़ के बालों से बनी छलनी में छानती हैं. यह सोम सभी को श्रेष्ठ धन प्रदान कराता है. (११) अपामिवे दूर्म यस्तर्तुराणाः प्र मनीषा ईरते सोममच्छ. नमस्यन्तीरुप च यन्ति सं चाच विशन्त्युशतीरुशन्तम्.. (१२) तेजी से उठने वाली लहरों की तरह यजमान की स्तुतियां उठती हैं. यजमान जल्दी से जल्दी अपनी स्तुति देवता के पास पहुंचाना चाहते हैं. स्तुतियां देवता की प्रशंसा करती हैं, उन के पास पहुंचती हैं और उन्हीं में एकमेक हो जाती हैं. (१२) ebook converter DEMO Watermarks*