सामवेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Samaveda Samhita with Hindi Translation
डा. रेखा व्यास द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 129, कुल 310 में से
संदर्भ में पढ़ेंअस्तबल से निकलते समय घोड़े गतिशील होते हैं। (७) अच्छा कोशं मधुश्रुतमसृग्रं वारे अव्यये. अवावशन्त धीतयः.. (८) मधुर रस से भरे द्रोणकलश में भेड़ के बालों से बनी छलनी से यजमान सोमरस को छानछान कर तैयार करते हैं. यजमान की अंगुलियां बारबार उस सोमरस को शुद्ध करना चाहती हैं. (८) अच्छा समुद्रमिन्दवो ऽ स्तं गावो न धेनवः. अग्मन्नृतस्य योनिमा.. (९) मनुष्यों को अपने दूध से तृप्त करने वाली दुधारू गाएं जैसे अपने बाड़े में जाती हैं, वैसे ही छान कर घड़े में भरे हुए सोम यज्ञ स्थल में जाते हैं. (९) दूसरा खंड अग्न आ याहि वीतये गृणानो हव्यदातये. नि होता सत्सि बर्हिषि.. (१) हे अग्नि! हम आप की स्तुति करते हैं. देवताओं को हवि पहुंचाने के लिए हम आप का आह्वान करते हैं. आप यज्ञ में कुश के आसन पर विराजिए. (१) तं त्वा समिद्भिरङ्गिरो घृतेन वर्धयामसि. बृहच्छोचा यविष्ठ्य.. (२) हे अग्नि! आप सुंदर व तरुण (युवा) हैं. हम समिधा और घी से आप को प्रज्वलित करते हैं. आप प्रज्वलित होइए. (२) स नः पृथु श्रवाय्यमच्छा देव विवाससि. बृहदग्ने सुवीर्यम्.. (३) हे अग्नि! आप हमें यश और यशदायी क्षमता दोनों ही प्रदान कीजिए. लोग उस यश के बारे में सुनने (जानने) के लिए इच्छुक रहें. (३) आ नो मित्रावरुणा घृतैर्गव्यूतिमुक्षतम्. मध्वा रजा ⁑ सि सुक्रतू.. (४) हे मित्र और वरुण! आप श्रेष्ठ कर्म करने वाले हैं. आप हमारे गौ स्थानों को घी, दूध से सींचने की कृपा कीजिए. आप हमारे लिए परलोक के निवास स्थानों को भी श्रेष्ठ, मधुर रसों से सींचने की कृपा कीजिए. (४) उरुश ⁑ सा नमोवृधा मह्ना दक्षस्य राजथः. द्राघिष्ठाभिः शुचिव्रता.. (५) हे मित्रावरुण! आप पवित्र कार्य करने वाले हैं. आप अनेक लोगों से प्रशंसित हैं. हवि के अन्न से आप बढ़ते हैं. आप अपनी शक्ति से सुशोभित होते हैं. (५) गृणाना जमदग्निना योनावृतस्य सीदतम्. पात ⁑ सोममृतावृधा.. (६) हे मित्रावरुण! जमदग्नि ऋषि आप की स्तुति करते हैं. आप यज्ञ स्थान में पधारिए, विराजिए. आप हमारे द्वारा तैयार किए गए सोमरस को ग्रहण कीजिए. आप हमारे यज्ञ के ebook converter DEMO Watermarks*