सामवेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Samaveda Samhita with Hindi Translation
डा. रेखा व्यास द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 130, कुल 310 में से
संदर्भ में पढ़ेंकर्मफल को बढ़ाने की कृपा कीजिए. (६) आ याहि सुषुमा हि त इन्द्र सोमं पिबा इमम्. इदं बर्हिः सदो मम.. (७) हे इंद्र! आप हमारे यज्ञ में पधारिए. हम ने आप के लिए स्वच्छ सोमरस तैयार किया है. आप इस सोमरस को पीजिए. आप इस कुश के आसन पर विराजमान होइए. (७) आ त्वा ब्रह्मयुजा हरी वहतामिन्द्र केशिना. उप ब्रह्माणि नः शृणु.. (८) हे इंद्र! आप के केश वाले मनोहर घोड़े मंत्र सुनते ही वाहन में जुत जाते हैं. आप के घोड़े आप को यज्ञ में लाने का कष्ट करें. आप हमारे पास यज्ञ में पधार कर भलीभांति हमारी प्रार्थनाओं को सुनने की कृपा कीजिए. (८) ब्रह्माणस्त्वा युजा वय १४ सोमपामिन्द्र सोमिनः. सुतावन्तो हवामहे.. (९) हे इंद्र! यजमान सोमयज्ञ (कर्ता) करने वाले हैं. सोमरस तैयार करने वाले यजमान ब्राह्मण हैं. हम आप के योग्य प्रार्थनाओं से सोमरस पीने वाले आप को आमंत्रित करते हैं. (९) इन्द्राग्नी आ गत १४ सुतं गीर्भिर्नभो वरेण्यम्. अस्य पातं धियेषिता.. (१०) हे अग्नि! हे इंद्र! सोमरस को हम ने अपनी स्तुतियों से पवित्र बनाया है. सोम स्वर्ग से आए हैं. इन्होंने हमारे भक्ति भाव को स्वीकार किया है. आप इस सोमरस को स्वीकार करने की कृपा कीजिए. (१०) इन्द्राग्नी जरितुः सचा यज्ञो जिगाति चेतनः. अया पातमम १४ सुतम्.. (११) हे अग्नि! हे इंद्र! आप यजमान पर कृपा कीजिए. आप उन की मदद कीजिए. सोमरस चेतनादायी है. उस से हम यज्ञ करते हैं. आप उस सोमरस को ग्रहण करने की कृपा कीजिए. (११) इन्द्रमग्निं कविच्छदा यज्ञस्य जूत्या वृणे. ता सोमस्येह तृम्पताम्.. (१२) हे अग्नि! हे इंद्र! सोम यज्ञ के प्रमुख साधन हैं. हम उन की प्रेरणा से प्रेरित होते हैं. आप दोनों देवता यजमान के लिए उपयुक्त फलदाता हैं. आप सोमरस पी कर तृप्त होइए और हमें यज्ञफल प्रदान करने की कृपा कीजिए. (१२) तीसरा खंड उच्चा ते जातमन्धसो दिवि सद्भूम्या ददे. उग्र १४ शर्म महि श्रवः.. (१) हे सोम! स्वर्गलोक में आप ने जन्म पाया है. आप शक्तिवर्द्धक, सुखदायी व यशदायी हैं. यजमान भूमिलोक पर अन्न के रूप में आप को प्राप्त करते हैं. (१) ebook converter DEMO Watermarks*