सामवेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Samaveda Samhita with Hindi Translation
डा. रेखा व्यास द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 131, कुल 310 में से
संदर्भ में पढ़ेंस न इन्द्राय यज्यवे वरुणाय मरुद्भ्यः. वरिवोवित्परि स्रव.. (२) हे सोम! आप धनदाता हैं. आप इंद्र, वरुण और मरुद्गण के लिए प्रवाहित होने की कृपा कीजिए. (२) एना विश्वान्यर्य आ द्युम्नानि मानुषाणाम्. सिषासन्तो वनामहे.. (३) हे सोम! आप की कृपा से हम ने मनुष्य को प्राप्त होने योग्य सब सुख (वैभव) पाया है. फिर भी हम सेवा भावना से आप की स्तुति करते हैं. (३) पुनानः सोम धारयापो वसानो अर्षसि. आ रत्नधा योनिमृतस्य सीदस्युत्सो देवो हिरण्ययः.. (४) हे सोम! आप सोने की तरह चमकते हैं. आप यज्ञ स्थान में विराजिए. पानी मिला कर छाने जाने पर धारा रूप में आप कलश में पधारते हैं. आप धन देने वाले हैं. (४) दुहान ऊधर्दिव्यं मधु प्रियं प्रत्न ँ सधस्थमासदत्. आपृच्छ्यं धरुणं वाज्यर्षसि नृभिर्धौतो विचक्षणः.. (५) यजमानों ने सोमरस छाना है. यह मधुर और आनंददायी है. यह अपने प्राचीन स्थान पर पहुंचता है. हे सोम! आप खास निरीक्षण करने वाले हैं. जो यजमान अच्छा यज्ञ करने की भावना रखते हैं, आप उस यजमान पर अपनी कृपा दृष्टि रखते हैं. (५) प्र तु द्रव परि कोशं नि षीद नृभिः पुनानो अभि वाजमर्ष. अश्वं न त्वा वाजिनं मर्जयन्ता ऽ च्छा बर्ही रशनाभिर्नयन्ति.. (६) हे सोम! आप जल्दी हमारे यज्ञ में पधारिए. आप जल्दी कलश में स्थापित हो जाइए. यजमान आप को छानते हैं. छन कर आप हवि के रूप में हवि अन्न को प्राप्त कीजिए. शक्तिमान घोड़ों को शुद्ध करने की तरह यजमान आप को शुद्ध करते हैं. लगाम पकड़ कर घोड़े को जैसे ले जाया जाता है, वैसे ही अंगुलियों से यजमान आप को यज्ञ स्थान तक ले जाते हैं. (६) स्वायुधः पवते देव इन्दुश्स्तिहा वृजना रक्षमाणः. पिता देवानां जनिता सुदक्षो विष्टम्भो दिवो धरुणः पृथिव्याः.. (७) हे सोम! आप उत्तम कोटि के अस्त्रशस्त्र वाले शत्रुनाशक, संरक्षक, उपद्रव दूर करने वाले, पालक, संरक्षक, देवताओं को उत्पन्न करने वाले हैं तथा पृथ्वीलोक को धारण करते हैं. आप स्वर्गलोक को विशेष आधार देते हैं. ऐसा दिव्य सोमरस यजमान छानते हैं. (७) ऋषिर्विप्रः पुर एता जनानामभूर्धिर उशना काव्येन. स चिद्विवेद निहितं यदासामपीच्यां ३ गुह्यं नाम गोनाम्.. (८) उशना ऋषि विद्वान्, परमज्ञानी, वैदिक कर्मकांड में दक्ष, धीर, प्रकाशमान और नेतृत्व ebook converter DEMO Watermarks*