सामवेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Samaveda Samhita with Hindi Translation
डा. रेखा व्यास द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 132, कुल 310 में से
संदर्भ में पढ़ेंकरने वाले हैं. उन्हीं उशना ऋषि ने स्तोत्रों के माध्यम से गायों में गुप्त रूप से रहने वाले सोम रस को मेहनत से प्राप्त किया. (८) चौथा खंड अभि त्वा शूर नोनुमो ऽ दुग्धा इव धेनवः. ईशानमस्य जगतः स्वर्दृशमीशानमिन्द्र तस्थुषः.. (१) हे इंद्र! आप शक्तिमान, सर्वज्ञाता व जगत् के स्वामी हैं. जैसे बिना दुही हुई गाएं रंभाती हुई अपने बछड़ों की ओर भागती हैं, वैसे ही हम आप के दर्शन और कृपा के लिए लालायित हैं. (१) न त्वावाँ अन्यो दिव्यो न पार्थिवो न जातो न जनिष्यते. अश्वायन्तो मघवन्निन्द्र वाजिनो गव्यन्तस्त्वा हवामहे.. (२) हे इंद्र! आप धनवान हैं. आप जैसा न कोई स्वर्गलोक और न इस पृथ्वीलोक में हुआ है और न होगा. हम गोधन व धनधान्य के लिए आप की स्तुति करते हैं. (२) कया नश्चित्र आ भुवदूती सदावृधः सखा. कया शचिष्ठया वृता.. (३) इंद्र सदैव बढ़ने वाले हैं. वे विलक्षण, अत्यंत शक्तिमान व हमारे सखा हैं. हम किस बुद्धि और किन संतुष्टिदायी पदार्थों से आप की उपासना करें? किनकिन शक्तियों से आप हमारे सहयोगी होंगे? (३) कस्त्वा सत्यो मदानां म ॐ हिष्ठो मत्सदन्धसः. दृढा चिदारुजे वसु.. (४) सोम आदरणीय व सत्यनिष्ठों के लिए आनंददायी हैं. उन्हें आनंद देने में वे सब से आगे हैं. सोम बलवान शत्रुओं के धन को नष्ट करने के लिए इंद्र को उत्साह और सामर्थ्य प्रदान करते हैं. (४) अभी षु णः सखीनामविता जरितॄणाम्. शतं भवास्यूतये.. (५) हे इंद्र! आप हमारे मित्र व यजमानों के संरक्षक हैं. आप हमारी सैकड़ों प्रकार से रक्षा करने के लिए अच्छी तैयारी कर लीजिए. (५) तं वो दस्ममृतीषहं वसोर्मन्दानमन्धसः. अभि वत्सं न स्वसरेषु धेनव इन्द्रं गीर्भिर्नवामहे.. (६) गोशाला में गाएं जैसे बछड़ों के लिए लालायित हो कर रंभाती हैं, वैसे ही हम इंद्र की स्तुति के लिए लालायित हो कर प्रार्थना करते हैं. वे शत्रुओं से रक्षा करते हैं. वे प्रकाशमान व सोमरस से संतुष्ट होने वाले हैं. (६) द्युक्ष ॐ सुदानुं तविषीभिरावृतं गिरिं न पुरु भोजसम्. ebook converter DEMO Watermarks*