भारतकोश
सामवेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

सामवेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Samaveda Samhita with Hindi Translation

डा. रेखा व्यास द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished310 पृष्ठ

पृष्ठ 133, कुल 310 में से

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पृष्ठ 133

क्षुमन्तं वाज २४ शतिन २४ सहस्रिणं मक्षू गोमन्तममीमहे.. (७) हे इंद्र! आप स्वर्गलोकवासी हैं. आप उत्तम दान के दाता, बहुत क्षमतावान व पालनहार हैं. हम सैकड़ोंहजारों की संख्या में गोधन आप से चाहते हैं. हम प्रचुर अन्न, धन आप से चाहते हैं. (७) तरोभिर्वो विदद्वसुमिन्द्र २४ सबाध ऊतये. बृहद्गायन्तः सुतसोमे अध्वरे हुवे भरं न कारिणम्.. (८) बच्चे अपनी सहायता के लिए जैसे अपने भरणपोषण करने वालों को पुकारते हैं, वैसे ही हम यजमान अपनी सहायता के लिए इंद्र को पुकारते हैं. इंद्र वेगवान घोड़ों वाले व वैभवशाली हैं. हे याजको! आप सोमयज्ञ में अपनी रक्षा के लिए बृहत्साम का गायन करते हुए उन की उपासना कीजिए. (८) न यं दुध्रा वरन्ते न स्थिरा मुरो मदेषु शिप्रमन्धसः. आदृ्त्या शशमानाय सुन्वते दाता जरित्र उक्थ्यम्.. (९) इंद्र सुंदर ठुड्डी वाले हैं. शक्तिशाली राक्षस व मरणधर्मा मनुष्य (कितने ही शक्तिशाली हों) भी उन्हें नहीं हरा सकते. वे सोमरस के आनंद में सोम यज्ञ करने वालों को प्रचुर यशदायी धन देते हैं. हम मन से उन की स्तुति करते हैं. (९) पांचवां खंड स्वादिष्ठया मदिष्ठया पवस्व सोम धारया. इन्द्राय पातवे सुतः.. (१) इंद्र के पीने के लिए स्वादिष्ट और मीठा सोमरस तैयार किया गया है. वह सोमरस अपनी पूर्ण मददायी धाराओं से इंद्र के लिए झरे. (१) रक्षोहा विश्वचर्षणििरभि योनिमयोहत. द्रोणे सधस्थमासदत्.. (२) सोम राक्षसनाशक हैं. जगद्रष्टा हैं. वे सोने के द्रोणकलश में विराजमान हो कर यज्ञस्थल में प्रतिष्ठित हो गए. (२) वरिवोधातमो भुवो म २४ हिष्ठो वृत्रहन्तमः. पर्षि राधो मघोनाम्.. (३) हे सोम! आप धनदाता हैं. आप शत्रुओं के प्रबल नाशक हैं. आप धनवान शत्रुओं के पास मौजूद रहने वाले धन हमें प्रदान कीजिए. (३) पवस्व मधुमत्तम इन्द्राय सोम ऋतुवित्तमो मदः. महि द्युक्षतमो मदः.. (४) हे सोम! आप अत्यंत मधुर हैं. आप यजमान को कर्मों का फल देते हैं. आप प्रकाशमान व तृप्तिदायी हैं. आप इंद्र के लिए पात्र में छन कर तैयार हो जाइए. (४) ebook converter DEMO Watermarks*