भारतकोश
सामवेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

सामवेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Samaveda Samhita with Hindi Translation

डा. रेखा व्यास द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished310 पृष्ठ

पृष्ठ 134, कुल 310 में से

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पृष्ठ 134

यस्य ते पीत्वा वृषभो वृषायते ऽस्य पीत्वा स्वर्विदः. स सुप्रकेतो अभ्यक्रमीदिषो ऽच्छा वाजं नैतशः.. (५) हे सोम! आप बहुत शक्तिमान हैं. आप को पी कर इंद्र और शक्तिमान हो जाते हैं. आप को पी कर बुद्धिमान भी प्रसन्न होते हैं. आप के प्रभाव से इंद्र युद्धों में घोड़े की तरह शत्रुओं के धनों को शीघ्र ही अपने अधीन कर लेते हैं. (५) इन्द्रमच्छ सुता इमे वृषणं यन्तु हरयः. शृष्टे जातास इन्दवः स्वर्विदः.. (६) सोमरस चमकीला और हरा है. वह बहुत जल्दी छन कर पात्र में पहुंच गया है. वह जल्दी से जल्दी इंद्र को प्राप्त हो. (६) अयं भराय सानसिरिन्द्राय पवते सुतः. सोमो जैत्रस्य चेतति यथा विदे.. (७) सभी लोगों को यह पता है कि सोमरस सेवन करने योग्य है. इसे छान कर तैयार किया गया है. इसे इंद्र के लिए मटकों में भरा गया है. सोमरस जीतने की इच्छा रखने वाले इंद्र को युद्धों में बहुत जोश देता है. (७) अस्येदिन्द्रो मदेष्वा ग्राभं गृभ्णाति सानसिम्. वज्रं च वृषणं भरत्समप्सुजित्.. (८) सेवन करने योग्य सोम को पी कर और प्रसन्न हो कर इंद्र धनुष धारण करते हैं. जल प्रवाह को जीतने वाले इंद्र वज्र को धारण करते हैं. (८) पुरोजिती वो अन्धसः सुताय मादयित्नवे. अप श्वान ॐ श्रथिष्टन सखायो दीर्घजिह्वयम्.. (९) हे यजमानो! निस्संदेह यह सोमरस जीत दिलाने वाला है. यह आप पूरी तरह मान लीजिए. यह प्रसन्नतादायी है. आप इस की ओर लपकने वाले लंबीलंबी जीभ वाले कुत्तों (राक्षसों) को इस से दूर भगाइए. (९) यो धारया पावकया परिप्रस्यन्दते सुतः. इन्दुरश्वो न कृत्व्यः.. (१०) यज्ञ में सोमरस यजमान का सहायक है. यह पारदर्शी धाराओं से घोड़े की तरह वेगवान हो कर कलश में जाता है. (१०) तं दुरोषमभी नरः सोमं विश्वाच्या धिया. यज्ञाय सन्वद्रयः.. (११) हे यजमानो! सोम दुष्टों का विनाश करने वाले हैं. आप उन को आमंत्रित कीजिए. आप यज्ञ का आदर करते हुए सब के कल्याण की भावना व्यक्त कीजिए. (११) अभि प्रियाणि पवते चनोहितो नामानि यह्वो अधि येषु वर्धते. आ सूर्यस्य बृहतो बृहन्नधि रथं विष्वञ्चमरुहद्दिविचक्षणः.. (१२) हे सोम! आप कल्याणकारी, अन्न स्वरूप व संसार को तृप्ति देने वाले हैं. आप जल को ebook converter DEMO Watermarks*