भारतकोश
सामवेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

सामवेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Samaveda Samhita with Hindi Translation

डा. रेखा व्यास द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished310 पृष्ठ

पृष्ठ 144, कुल 310 में से

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पृष्ठ 144

आ हर्यतो अर्जुनो अत्के अव्यत प्रियः सूनुर्न मर्ज्यः. तमी ॐ हिन्वन्त्यपसो यथा रथं नदीष्वा गभस्त्योः.. (५) सोमरस को बच्चे की तरह साफसुथरा बना लिया है. प्रिय सोमरस को तेज गति से जल में मिलाया जाता है. वह वैसे ही वेग से पानी में मिलता है, जैसे युद्ध में तेज गति से कोई रथ जाता है. (५) प्र सोमासो मदच्युतः श्रवसे नो मघोनाम्. सुता विदथे अक्रमूः.. (६) सोमरस आनंद बरसाने वाला व यशदाता है. वह यज्ञ में निरंतर पहुंच कर इच्छाओं की पूर्ति करता है. (६) आदी ॐ ह ॐ सो यथा गणं विश्वस्यावीवशनमतिम्. अत्यो न गोभिरज्यते.. (७) सोमरस हंस की गति से जाता है. वह संसार के बुद्धिमानों की बुद्धि तक पहुंच रखता है. (७) आदीं त्रितस्य योषणे हरि ॐ हिन्वन्त्यद्रिभिः. इन्दुमिन्द्राय पीतये.. (८) सोमरस हरा है. इसे पत्थरों से कूट कर निचोड़ा जाता है. उस को तीन ऋषियों की अंगुलियों से इंद्र के पीने के लिए निचोड़ा जाता है. (८) अया पवस्व देवयू रेभन्पवित्रं पर्योषि विश्वतः. मधोर्धारा असृक्षत.. (९) हे सोम! आप देवताओं से मिलने के इच्छुक हैं. आप पवित्र और अविरल मीठी धारा से झरते हैं व आवाज करते हुए प्रवाहित होते हैं. (९) पवते हर्यतो हरिरति ह्वरा ॐ सि र ॐ ह्या. अभ्यर्ष स्तोतृभ्यो वीरवद्यशः.. (१०) सोमरस पवित्र और हरा है. वह पराक्रमी संतान और यश प्राप्ति के इच्छुक यजमानों के लिए प्रवाहित होता है. (१०) प्र सुन्वानायान्धसो मर्तो न वष्ट तद्वचः. अप श्वानमराधसं हता मखं न भृगवः.. (११) परिष्कृत किए जाते समय सोमरस आवाज करता है. दुष्ट लोग इस आवाज को न सुनें. भृगुओं ने जैसे मख को दूर किया, उसी तरह पापी और कुत्तों को यज्ञ से दूर किया जाए. (११) ebook converter DEMO Watermarks*