भारतकोश
सामवेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

सामवेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Samaveda Samhita with Hindi Translation

डा. रेखा व्यास द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished310 पृष्ठ

पृष्ठ 143, कुल 310 में से

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पृष्ठ 143

संस्कारपूर्वक अनेक विधियों से परिष्कृत किया जाता है. (५) दुहानः प्रत्नमित्पयः पवित्रे परि षिच्यसे. क्रन्दं देवाँ अजीजनः.. (६) सोमरस को छलनी से परिष्कृत किया जाता है और उसे बरतन (पात्र) में निचोड़ा जाता है. सोम आवाज करते हुए पात्र में जाते हैं तो लगता है मानो वे देवताओं का आह्वान कर रहे हों. (६) उप शिक्षापतस्थुषो भियसमा धेहि शत्रवे. पवमान विदा रयिम्.. (७) हे सोम! आप अकल्याणकारियों को भयभीत कीजिए. आप हमारा मार्गदर्शन कीजिए. आप हमें धनधान्य से परिपूर्ण करने की कृपा कीजिए. (७) उपो षु जातमप्तुरं गोभिर्भङ्गं परिष्कृतम्. इन्दुं देवा अयासिषुः.. (८) सोमरस को निचोड़ा जाता है. तत्पश्चात उस को परिष्कृत किया जाता है. फिर जल में मिलाया जाता है. आप को गाय के दूध में मिलाया जाता है. देवता भी सोम को बुलाते हैं. (८) उपास्मै गायता नरः पवमानायेन्दवे. अभि देवाँ इयक्षते... (९) हे यजमानो! आप देवताओं के गुण गाने की अपेक्षा सोम के गुण गाइए. (९) छठा खंड प्र सोमासो विपश्चितो ऽ पो नयन्त ऊर्मयः. वनानि महिषा इव.. (१) सागर की लहरें सागर में जैसे मिल जाती हैं, वैसे सोमरस जल में मिल जाता है. वन में मिले भैंसों की तरह सोमरस जल में एकमेक हो जाता है. (१) अभि द्रोणानि बभ्रवः शुक्रा ऋतस्य धारया. वाजं गोमन्तमक्षरन्.. (२) सोमरस चमकीला है. वह अपनी ऋत की धारा से भूरा सोम गाय के दूध में झरता है. वह शक्तिमान है. (२) सुता इन्द्राय वायवे वरुणाय मरुद्भ्यः. सोमा अर्षन्तु विष्णवे.. (३) सोम इंद्र, वायु, मरुद्गणों व विष्णु को प्राप्त हों. (३) प्र सोम देववीतये सिन्धुर्न पिप्ये अर्णसा. अ ॐ शोः पयसा मदिरो न जागृविरच्छा कोशं मधुश्रुतम्.. (४) हे सोम! आप को पानी से भरीपूरी नदियों की तरह पानी में मिलाया जाता है. आप मदिर (आनंददायी) व जाग्रत हैं. मधुरता चुआते हुए सोमरस (पात्र में) इकट्ठा होता है. (४) ebook converter DEMO Watermarks*