भारतकोश
सामवेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

सामवेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Samaveda Samhita with Hindi Translation

डा. रेखा व्यास द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished310 पृष्ठ

पृष्ठ 142, कुल 310 में से

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पृष्ठ 142

तवेदुषो व्युषि सूर्यस्य च सं भक्तेन गमेमहि.. (४) सूर्य, नक्षत्र और ग्रह ये तीनों आकाश को प्रकाशमान करते हैं. सूर्य अपनी किरणों का प्रसार करते हैं और प्रकाश से हम भक्तों तक पहुंचते हैं. (४) इमा उ वां दिविष्टय उस्रा हवन्ते अश्विना. अयं वामह्ने ऽ वसे शचीवसू विशंविश 28 हि गच्छथ:.. (५) हे अश्विनीकुमारो! आप स्वर्गलोक के वासी हैं. स्वर्ग प्राप्त करने के इच्छुक लोग अपनी इच्छापूर्ति के लिए आप का आह्वान करते हैं. आप स्तुति करने वालों के पास पहुंचते हैं. हम आप का आह्वान करते हैं. (५) युवं चित्रं ददथुर्भोजनं नरा चोदथा 28 सूनूतावते. अर्वाग्रथ 28 समनसा नि यच्छतं पिबत 28 सोम्यं मधु.. (६) हे अश्विनीकुमारो! आप युवा नेता हैं और श्रेष्ठ आहार देने वाले व स्तुति करने वालों को प्रेरित करते हैं. कृपया आप अपना रथ रोकिए. आप अपना मन लगा कर मधुर सोमरस का पान कीजिए. (६) पांचवां खंड अस्य प्रत्नामनु द्युत 28 शुक्रं दुदुह्वे अहय:. पयः सहस्रामृषिम्.. (१) सोमरस चमकीला, ज्ञान बढ़ाने वाला व मनोकामना पूरी करने वाला है. ऋषियों ने इस के सहस्र स्वरूप का स्मरण कर के इसे तैयार किया है. (१) अय 28 सूर्य इवोपद्गय 28 सरा 28 सि धावति. सप्त प्रवत आ दिवम्.. (२) सोम सात धाराओं से उसी प्रकार दौड़ते हैं (प्रवाहित होते हैं), जिस तरह सूर्य स्वर्गलोक से सात किरणों से धरती पर आने के लिए दौड़ते हैं. (२) अयं विश्वानि तिष्ठति पुनानो भुवनोपरि. सोमो देवो न सूर्य:.. (३) सोम सभी भुवनों के ऊपर प्रतिष्ठित हैं व समस्त संसार पर राज करते हैं. वे हमारे सूर्य हैं. (३) एष प्रत्नेन जन्मना देवो देवेभ्यः सुतः. हरिः पवित्रे अर्षति.. (४) सोमरस दिव्य है. देवता संस्कारपूर्वक उसे परिष्कृत करते हैं. वह हरा है और उसे पवित्र छलनी में परिष्कृत किया जाता है. (४) एष प्रत्नेन मन्मना देवो देवेभ्यस्परि. कविर्विप्रेण वावृधे.. (५) सोम कवि और विद्वानों से प्रशंसा प्राप्त करते हैं. वे सभी देवताओं से ऊपर हैं. उन को ebook converter DEMO Watermarks*