भारतकोश
सामवेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

सामवेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Samaveda Samhita with Hindi Translation

डा. रेखा व्यास द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished310 पृष्ठ

पृष्ठ 150, कुल 310 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 150

रसाय्यः पयसा पिन्वमान ईरयन्नेषि मधुमन्तमंशुम्. पवमान सन्तनिमेषि कृण्वन्निन्द्राय सोम परिषिच्यमानः.. (५) स्वादिष्ट और मीठा सोमरस गाय का दूध मिलाने से और स्वादिष्ट और मीठा हो जाता है. पानी मिला कर छानने पर धारा रूप धारण कर के सोम इंद्र को प्राप्त हो जाते हैं. (५) एवा पवस्व मदिरो मदायोदग्राभस्य नमयन्वधस्नुम्. परि वर्णं भरमाणो रुशन्तं गव्युर्नो अर्ष परि सोम सिक्तः.. (६) हे सोम! आप स्फूर्तिदायी हैं. आप वृत्रासुर का वध हो जाने के बाद पानी बहाने वाले मेघों को झुकाइए. उन के जल में मिल कर छनते जाइए. आनंददायी होइए. आप पानी में मिल कर और चमकीले हो जाइए. आप गाय के दूध के रूप में हमारे चारों ओर प्रवाहित होइए. (६) चौथा खंड त्वामिद्धि हवामहे सातौ वाजस्य कारवः. त्वां वृत्रेष्विन्द्र सत्पतिं नरस्त्वां काष्ठास्वर्वतः.. (१) हे इंद्र! हम यजमान अपने अन्न की बढ़ोतरी की आकांक्षा से आप को आमंत्रित करते हैं. आप पर्वतवासी, सत्पति व वृत्रहंता हैं. श्रेष्ठ जन विपत्ति के समय आप को स्मरण करते हैं. (१) स त्वं नश्चित्र वज्रहस्त धृष्णुया मह स्तवानो अद्रिवः. गामश्वं रथ्यमिन्द्र सं किर सत्रा वाजं न जिग्युषे.. (२) हे इंद्र! आप हाथ में वज्र धारण करते हैं. आप बलधारी व शक्तिधारी हैं. आप यजमानों की प्रार्थना से प्रसन्न होइए. उन्हें अन्नधन प्रदान करने की कृपा कीजिए. (२) अभि प्र वः सुराधसमिन्द्रमर्च यथा विदे. यो जरितृभ्यो मघवा पुरूवसुः सहस्रेणेव शिक्षति.. (३) हे यजमानो! इंद्र नाना प्रकार के वैभव देने वाले हैं. आप हजारों विधियों से उन्हें प्रसन्न करने की कोशिश करो. (३) शतानीकेव प्र जिगाति धृष्णुया हन्ति वृत्राणि दाशुषे. गिरेरिव प्र रसा अस्य पिन्विरे दत्राणि पुरुभोजसः.. (४) दुश्मनों का संहार करते समय इंद्र यजमान की वैसे ही रक्षा करते हैं, जैसे सेनानी शत्रु पर चढ़ाई के समय सेना की. उन का यह संरक्षण यजमानों को झरने के जल की तरह शांति और तृप्ति प्रदान करता है. (४) ebook converter DEMO Watermarks*