सामवेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Samaveda Samhita with Hindi Translation
डा. रेखा व्यास द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 161, कुल 310 में से
संदर्भ में पढ़ेंयेन ज्योति 28 ष्पायवे मनवे च विवेदिथ. मन्दानो अस्य बर्हिषो वि राजसि.. (४) हे इंद्र! आप मनुष्य को दीर्घायु बनाते हैं व मानव के हितकारी हैं. आप ने मनुष्यों के लिए ही कई वस्तुएं प्रकाशित की हैं. आप आइए प्रसन्न होइए. आप कुश के आसन पर विराजने की कृपा कीजिए. (४) तदद्या चित्त उक्थिनो ऽ नु ष्टुवन्ति पूर्वथा. वृषपत्नीरपो जया दिवेदिवे.. (५) हे इंद्र! पूर्व से ही आप के यजमान आप की गाथा (यश) गाते हैं. अब भी आप के यश को गाते हैं. आप असुरों पर विजय पाने में हमारी सहायता कीजिए. हम प्रतिदिन आप की स्तुति करते हैं. (५) श्रुधी हवं तिरश्च्या इन्द्र यस्त्वा सपर्यति. सुवीर्यस्य गोमतो रायस्पूर्तिं महाँ असि.. (६) हे इंद्र! आप महान व तिरश्चि ऋषि प्रार्थना करने में लगे हुए हैं. आप उन की प्रार्थना सुनने की कृपा कीजिए. आप हमें श्रेष्ठ वीर्यवान व धनवान बनाइए. (६) यस्त इन्द्र नवीयसीं गिरं मन्दामजीजनत्. चिकित्विमनसं धियं प्रत्नामृतस्य पिप्युषीम्.. (७) हे इंद्र! जो यजमान नईनई प्रार्थनाओं से आप की उपासना करते हैं, उन्हें श्रेष्ठ बुद्धि मिलती है. आप उन पर अमृत बरसाते हैं व मन को पवित्र बनाने वाली सोच प्रदान करते हैं. (७) तमु ष्ट्वाम यं गिर इन्द्र मुक्थानि वावृधुः. पुरूण्यस्य पौ 28 स्या सिषासन्तो वनामहे.. (८) हे इंद्र! बहुत सी प्रार्थनाओं से हम ने आप की उपासना की है और कर रहे हैं. हम स्तोत्रों और मंत्रों से आप का यशगान करते हैं. आप पराक्रमी हैं. हम पूरी निष्ठा के साथ आप की उपासना करते हैं. (८) ebook converter DEMO Watermarks*