भारतकोश
सामवेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

सामवेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Samaveda Samhita with Hindi Translation

डा. रेखा व्यास द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished310 पृष्ठ

पृष्ठ 162, कुल 310 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 162

पांचवां अध्याय पहला खंड प्र त आश्विनीः पवमान धेनवो दिव्या असृग्रन्पयसा धरीमणि. प्रान्तरिक्षात्स्थाविरीस्ते असृक्षत ये त्वा मृजन्त्यृषिषाण वेधसः.. (१) हे सोम! आप पवित्र हैं और आप की दुधारू गाएं दिव्य हैं. उन के दूध की धाराएं वेगपूर्वक द्रोणकलश में पहुंचती हैं. ऋषि शुद्ध सोमरस का सेवन करते हैं. अंतरिक्ष से उस की धाराओं को बरतन में पहुंचाते हैं. (१) उभयतः पवमानस्य रश्मयो ध्रुवस्य सतः परि यन्ति केतवः. यदी पवित्रे अधि मृज्यते हरिः सत्ता नि योनौ कलशेषु सीदति.. (२) हे सोम! स्थिर स्वभाव वाले आप को जब छाना जाता है तो आप की किरणें चारों ओर फैलती हैं. हरा सोमरस छलनी में छाना जाता है तो वह द्रोणकलश में रहता है. सोम स्थिर रहने के इच्छुक हैं. (२) विश्वा धामानि विश्वचक्ष ऋभ्वसः प्रभोष्टे सतः परि यन्ति केतवः. व्यानशी पवसे सोम धर्मणा पतिर्विश्वस्य भुवनस्य राजसि.. (३) हे सोम! आप सर्वद्रष्टा व शक्तिशाली हैं. आप की बड़ीबड़ी किरणें सब ओर व्यापने वाली व प्रकाश फैलाने वाली हैं. आप पवित्र व विश्वपति हैं. आप भुवन में सुशोभित होते हैं. (३) पवमानो अजीजनद्दिवश्चित्रं न तन्यतुम्. ज्योतिर्वैश्वानरं बृहत्.. (४) हे सोम! आप पवित्र हैं. सोम स्वर्गलोक में बिजली जैसा विशाल वैश्वानर नामक तेज उपजाते हैं. (४) पवमान रसस्तव मदो राजन्नदुच्छुनः. वि वारमव्यमर्षति.. (५) हे सोम! आप पवित्र व मदकारी हैं. आप का रस राक्षसों के लिए वर्जित है. आप का रस भेड़ के बालों से बनी छलनी में छन कर द्रोणकलश तक पहुंचता है. (५) पवमानस्य ते रसो दक्षो वि राजति द्युमान्. ज्योतिर्विश्वं स्वर्द्दशे.. (६) हे सोम! आप पवित्र हैं. आप का रस बलवान व चमकीला है. आप सर्वत्र व्याप्त एवं ebook converter DEMO Watermarks*