सामवेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Samaveda Samhita with Hindi Translation
डा. रेखा व्यास द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 163, कुल 310 में से
संदर्भ में पढ़ेंआप का प्रकाश (ज्योति) सर्वत्र दिखाई देता है. (६) प्र यद्गावो न भूर्णयस्त्वेषा अयासो अक्रमुः. घ्नन्तः कृष्णामप त्वचम्.. (७) हे सोम! आप गायों के समान गतिशील, प्रकाशमान व काली चमड़ी को हटा कर द्रोणकलश में प्रवेश करते हैं. आप की स्तुति की जाती है. (७) सुवितस्य वनामहे ऽ ति सेतुं दुराय्यम्. साह्याम दस्युमव्रतम्.. (८) हे सोम! आप सुखद हैं. हम कठिनाई से बंधक बनने वाले राक्षसों के बंधन की प्रार्थना करते हैं. अव्रती (अच्छे काम न करने वाले) के नाश की कामना करते हैं. (८) शृण्वे वृष्टेरिव स्वनः पवमानस्य शुष्मिणः. चरन्ति विद्युतो दिवि.. (९) हे सोम! वर्षा की आवाज के समान शुद्ध किए जाते समय बरतन में गिरती हुई धार से उत्पन्न आप की आवाज सुनाई देती है. आप की शक्तिमान किरणें आकाश में भ्रमण करती हैं. (९) आ पवस्व महीमिषं गोमदिन्दो हिरण्यवत्. अश्ववत्सोम वीरवत्.. (१०) हे सोम! आप पवित्र व रसीले हैं. आप हमें गोवान, स्वर्णवान, अश्ववान एवं पुत्रवान बनाइए. आप हमें पौत्रवान बनाइए. (१०) पवस्व विश्वचर्षण आ मही रोदसी पृण. उषाः सूर्यो न रश्मिभिः.. (११) हे सोम! आप विश्वद्रष्टा व रसीले हैं. अपने रस से स्वर्गलोक और पृथ्वीलोक को वैसे ही भर दीजिए, जैसे सूर्य अपनी किरणों से सारे संसार को भर देते हैं. (११) परिणः शर्मयन्त्या धारया सोम विश्वतः. सरा रसेव विष्टपम्.. (१२) हे सोम! आप उसी तरह अपनी धाराएं हमारे चारों ओर फैला दीजिए, जिस तरह भूलोक के चारों ओर सुखद जल की धाराएं फैली हुई हैं. (१२) दूसरा खंड आशुरर्ष बृहन्मते परि प्रियेण धाम्ना. यत्रा देवा इति ब्रुवन्.. (१) हे सोम! आप मतिमान (विद्वान्) और देवों के प्रिय हैं. आप अपनी रसधार के साथ शीघ्र आइए. इस यज्ञ में इंद्र आदि देवता हैं. अतः आप इस यज्ञ में अवश्य आइए. (१) परिष्कृण्वन्ननिष्कृतं जनाय यातयन्निषः. वृष्टिं दिवः परि स्रव.. (२) हे सोम! आप अशुद्ध स्थान को शुद्ध करने की कृपा कीजिए. आप यजमान के भरणपोषण हेतु अन्न आदि के लिए वर्षा करने की कृपा कीजिए. (२) ebook converter DEMO Watermarks*