सामवेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Samaveda Samhita with Hindi Translation
डा. रेखा व्यास द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 164, कुल 310 में से
संदर्भ में पढ़ेंअय स यो दिवस्परि रघुयामा पवित्र आ. सिन्धोरूर्म्मा व्यक्षरत्.. (३) हे सोम! आप स्वर्गलोक से ऊपर मंथर गति वाले होते हैं. आप को जब छलनी से छाना जाता है तो आप बहुत वेगवान हो कर द्रोणकलश में आ जाते हैं. (३) सुत एति पवित्र आ त्विषिं दधान ओजसा. विचक्षणो विरोचयन्.. (४) हे सोम! परिष्कृत किए जाते, प्रकाश फैलाते, सब को देखते व ओज धारण करते हुए, आप वेग से छलनी में छन जाते हैं. (४) आविवासनपरावतो अथो अर्वावतः सुतः. इन्द्राय सिच्यते मधु.. (५) हे सोम! छानने के बाद आप का रस दूर और पास के देवताओं को भेंट किया जाता है. इंद्र के लिए मधुर सोमरस का सिंचन किया जाता है. (५) समीचीना अनूषत हरि हिन्वन्त्यद्रिभिः. इन्दुमिन्द्राय पीतये.. (६) उपयुक्त रीति से इकट्ठे हुए उपासक सोम की उपासना करते हैं. इंद्र के पीने के लिए हरे सोम को पत्थरों से कूटा जाता है. (६) हिन्वन्ति सूरमुस्रयः स्वसारो जामयस्पतिम्. महामिन्दुं महीयुवः.. (७) हे सोम! ये अंगुलियां काम के लिए सब ओर जाने वाली हैं. आपस में बहनों की तरह प्रेम भाव से रहने वाली ये अंगुलियां सोमरस को शुद्ध करती हैं. ये श्रेष्ठ वीर, चेतन व सब के स्वामी सोमरस को निचोड़ती हैं. (७) पवमान रुचारुचा देव देवेभ्यः सुतः. विश्वा वसून्या विश.. (८) हे सोम! आप चमकीले व शुद्ध हैं. देवताओं को भेंट करने के लिए आप को छान कर तैयार किया गया है. आप हमें संसार के सारे वैभव दे दीजिए. (८) आ पवमान सुष्टुतिं वृष्टिं देवेभ्यो दुवः. इषे पवस्व संयतम्.. (९) हे सोम! आप शुद्ध व प्रशंसा के योग्य हैं. आप अपने रस की वर्षा वैसे ही हम पर करिए, जैसे देवता हमारे लिए अन्न और आशीर्वादों की वर्षा करते हैं. (९) तीसरा खंड जनस्य गोपा अजनिष्ट जागृविरग्निः सुदक्षः सुविताय नव्यसे. घृतप्रतीको बृहता दिविस्पृशा द्युमद्भि भाति भरतेभ्यः शुचिः.. (१) हे अग्नि! आप प्रजा के रक्षक, जाग्रत करने वाले व कुशलता प्रदान करने वाले हैं. आप यजमान को उन्नति के पथ पर अग्रसर करने के लिए प्रकट होते हैं. आप घी की आहुति से प्रज्वलित होते हैं. आप विराट् (असीम) आकाश तक अपनी पहुंच रखते हैं. आप पवित्र व ebook converter DEMO Watermarks*