भारतकोश
सामवेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

सामवेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Samaveda Samhita with Hindi Translation

डा. रेखा व्यास द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished310 पृष्ठ

पृष्ठ 173, कुल 310 में से

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पृष्ठ 173

प्र सोमासो अधन्विषुः पवमानास इन्दवः. श्रीणाना अप्सु वृञ्जते.. (७) हे सोम! आप पवित्र व शीतल हैं. आप जल के साथ द्रोणकलश में परस्पर मिश्रित हो रहे हैं. (७) अभि गावो अधन्विषुरापो न प्रवता यतीः. पुनाना इन्द्रमाशत्.. (८) हे इंद्र! आप के भक्षण (पीने) के लिए सोमरस नीचे बरतन में शुद्ध हो कर पहुंच रहा है. (८) प्र पवमान धन्वसि सोमेन्द्राय मादनः. नृभिर्यतो वि नीयसे.. (९) हे सोम! आप पवित्र व इंद्र के लिए आनंददायी हैं. यजमान द्वारा आप निर्धारित स्थान तक ले जाए जा रहे हैं. (९) इन्दो यदद्रिभिः सुतः पवित्रं परिदीयसे. अरमिन्द्रस्य धाम्ने.. (१०) हे इंद्र! सोमरस आप के पीने योग्य हो गया है. इसे पत्थरों से कूट कर निचोड़ा गया एवं छलनी (भेड़ों के बालों से बनी) से छाना गया है. (१०) तव ꣵ सोम नृमादनः पवस्व चर्षणीधृतिः. सस्निर्यो अनुमाद्यः.. (११) हे सोम! आप पवित्र व मनुष्यों के लिए मददायी हैं. आप परिष्कृति (शुद्धता) के बाद यजमान द्वारा (देवों को चढ़ाने के लिए) धारण किए जाते हैं. (११) पवस्व वृत्रहन्तम उक्थेभिरनुमाद्यः. शुचिः पावको अद्भुत.. (१२) हे सोम! आप पवित्र व विलक्षण हैं. आप वृत्रहंता के लिए स्तुतियों से शुद्धता और पवित्रता को प्राप्त होते हैं. (१२) शुचिः पावक उच्यते सोमः सुतः स मधुमान्. देवावीरघश ꣵ सहा.. (१३) हे सोम! आप पवित्र, शुद्ध व मधुरता से युक्त हैं. आप देवों को आनंदित करने वाले हैं. आप को देवों का पुत्र कहा गया है. (१३) दूसरा खंड प्र कविर्देववीतये ऽ व्या वारेभिरव्यत. साह्वान्विश्वा अभि स्पृधः.. (१) हे सोम! आप कवि हैं. आप को देवताओं के लिए परिष्कृत किया जाता है. आप सभी शत्रुओं से स्पर्धा करने वाले हैं. (१) स हि ष्मा जरितृभ्य आ वाजं गोमन्तमिन्वति. पवमानः सहस्रिणम्.. (२) हे सोम! आप सहस्रों पवित्र धाराओं से झरते हैं. आप उपासकों को गोवान और ebook converter DEMO Watermarks*