भारतकोश
सामवेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

सामवेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Samaveda Samhita with Hindi Translation

डा. रेखा व्यास द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished310 पृष्ठ

पृष्ठ 174, कुल 310 में से

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पृष्ठ 174

धनवान बनाते हैं। (२) परि विश्वानि चेतसा मृज्यसे पवसे मती. स नः सोम श्रवो विदः.. (३) हे सोम! आप सर्वज्ञाता हैं. आप विश्व को चेतनामय बनाते हैं. आप को बुद्धिपूर्वक परिष्कृत किया जाता है. आप हमारी स्तुतियों को सुनने की कृपा कीजिए. (३) अभ्यर्ष बृहद्यशो मघवद्भ्यो ध्रुव 𑁍 रयिम्. इष 𑁍 स्तोतृभ्य आ भर.. (४) हे सोम! आप विशाल व यशस्वी हैं. आप स्तोताओं को अन्नवान और धनवान बनाने की कृपा कीजिए. (४) त्व 𑁍 राजेव सुव्रतो गिरः सोमा विवेशिथ. पुनानो वह्ने अद्भुत.. (५) हे सोम! आप राजा के समान, अच्छे व्रत संकल्प वाले, विलक्षण व पवित्र मन वाले हैं. यजमान की वाणी को आप सुनने और स्वीकारने की कृपा कीजिए. (५) स वह्निरप्सु दुष्टरो मृज्यमानो गभस्त्योः. सोमश्चमूषु सीदति.. (६) हे सोम! आप जलमय व तेजस्वी हैं. आप परिष्कृत किए जाते हुए द्रोणकलश में जा कर बैठ जाते हैं. (६) क्रीडुर्मखो न म 𑁍 ह्युः पवित्रं 𑁍 सोम गच्छसि. दधत्स्तोत्रे सुवीर्यम्.. (७) हे सोम! आप पवित्र व महान हैं. आप यज्ञ की तरह दूसरों का हित करने वाले हैं. आप यजमान के लिए श्रेष्ठ वीर्य धारण करते हैं. आप उपासकों की उपासना तक पहुंचते हैं. (७) यवंयवं नो अन्धसा पुष्टंपुष्टं परि स्रव. विश्वा च सोम सौभगा.. (८) हे सोम! आप हमें बारबार पुष्टातिपुष्ट (अधिक पुष्ट) बनाने के लिए झरिए. आप हमें सारे वैभवों से सौभाग्यवान बनाने की कृपा कीजिए. (८) इन्दो यथा तव स्तवो यथा ते जातमन्धसः. नि बर्हिषि प्रिये सदः.. (९) हे सोम! यजमान जिस भावना से आप की स्तुति करते हैं, आप भी उसी प्रिय भावना से यज्ञ में कुश के आसन पर विराजने की कृपा कीजिए. (९) उत नो गोविदश्ववित्पवस्व सोमान्धसा. मक्षूतमेभिरहभिः.. (१०) हे सोम! आप हमें गोवान व अश्ववान बनाइए. आप हमें अकूत वैभव प्रदान कीजिए. (१०) यो जिनाति न जीयते हन्ति शत्रुमभीत्य. स पवस्व सहस्रजित्.. (११) हे सोम! आप से डर कर शत्रु नष्ट हो जाते हैं. आप हजारों शत्रुओं को जीतने वाले हैं. हम पवित्र सोम की स्तुति करते हैं. (११) ebook converter DEMO Watermarks*