सामवेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Samaveda Samhita with Hindi Translation
डा. रेखा व्यास द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 175, कुल 310 में से
संदर्भ में पढ़ेंयास्ते धारा मधुश्चुतो ऽ सृग्रमिन्द ऊतये. ताभिः पवित्रमासदः.. (१२) हे सोम! आप की वे पवित्र धाराएं हमें संरक्षण प्रदान करने वाली हैं. आप उन के साथ यहां पधारिए. (१२) सो अर्षेन्द्राय पीतये तिरो वाराण्यव्यया. सीदन्नृतस्य योनिमा.. (१३) हे सोम! आप को इंद्र की तृप्ति के लिए छलनी से छान कर तैयार किया जाता है. आप यज्ञ में अपने स्थान पर विराजने की कृपा कीजिए. (१३) त्व ꣳ सोम परि स्रव स्वादिष्ठो अङ्गिरोभ्यः. वरिवोविद्दधृतं पयः.. (१४) हे सोम! आप स्वादिष्ट हैं. आप अंगिरा आदि ऋषियों के लिए पौष्टिक पदार्थ प्रदान करने की कृपा कीजिए. (१४) तीसरा खंड तव श्रियो वर्ष्यस्येव विद्युतो ऽ ग्नेश्चिकित्र उषासामिवेतयः. यदोषधीरभिसृष्टो वनानि च परि स्वयं चिनुषे अन्नमासनि.. (१) हे अग्नि! जब हम अन्न और वनस्पतियों को आप के मुंह में डालते हैं, उस समय आप की लपटें वर्षा के समय चमकने वाली बिजली और उषा के प्रकाश की तरह दृष्टिगोचर होती हैं. (१) वातोपजूत इषितो वशाँ अनु तृषु यदन्ना वेविषद्द्वितिष्ठसे. आ ते यतन्ते रथ्यो ३ यथा पृथक् शर्था ꣳ स्यग्ने अजरस्य धक्षतः.. (२) हे अग्नि! हवा से हिलने पर आप वनस्पतियों के पीछे जा कर उसे चारों ओर से आवृत्त कर (घेर) लेते हैं, उस समय आप को बढ़ते हुए देख कर ऐसा लगता है—मानो रथ पर चढ़ कर कोई शूरवीर सब कुछ नष्ट (शत्रुओं का) करने के लिए आगे बढ़ रहा हो. (२) मेधाकारं विदथस्य प्रसाधनमग्नि ꣳ होतारं परिभूतरं मतिम्. त्वामर्भस्य हविषः समानमित्त्वां महो वृणते नान्यं त्वत्.. (३) हे अग्नि! आप बुद्धि को बढ़ाते हैं. आप यज्ञ के प्रसाधन (शृंगार) हैं. आप विशाल आकार के हैं. हम होता हवि स्वीकार करने के लिए एक स्वर से आप के अलावा किसी और का आह्वान नहीं कर रहे हैं. (३) पुरूरुणा चिद्धस्त्यवो नूनं वां वरुण. मित्र व ꣳ सि वा ꣳ सुमतिम्.. (४) हे सूर्य! हे वरुण! आप पर्याप्त साधनों वाले हैं. आप अपनी सुमति हमें प्राप्त कराने की कृपा कीजिए. हम आप के मित्र हो जाएं. (४) ebook converter DEMO Watermarks*