भारतकोश
सामवेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

सामवेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Samaveda Samhita with Hindi Translation

डा. रेखा व्यास द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished310 पृष्ठ

पृष्ठ 183, कुल 310 में से

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पृष्ठ 183

सातवां अध्याय पहला खंड ज्योतिर्यज्ञस्य पवते मधु प्रियं पिता देवानां जनिता विभूवसुः. दधाति रत्न ꣳ स्वधयोरपीच्यं मदिन्तमो मत्सर इन्द्रियो रसः.. (१) हे सोम! आप पवित्र, मधुर, देवताओं को प्रिय, पालक एवं धन प्रदान करने वाले हैं. आप स्फूर्तिदायी हैं. आप इंद्र को मदमस्त बना देते हैं. आप यह की ज्योति हैं. आप यजमान के लिए रत्न धारण करते हैं. (१) अभिक्रन्दन्कलशं वाज्यर्षति पतिर्दिवः शतधारो विचक्षणः. हरिर्मित्रस्य सदनेषु सीदति मर्मृजानो ऽ विभिः सिन्धुभिर्वृषा.. (२) हे सोम! आप स्वर्गलोक के स्वामी, सैकड़ों धारा वाले, विलक्षण, स्फूर्तिदायी, ऊर्जा वर्द्धक व हरी आभा वाले हैं. आप आवाज करते हुए द्रोणकलश में जाते हैं. आप जल में मिल कर तैयार होते हैं. आप मित्र के घर में रहने की तरह कलश में रहते हैं. (२) अग्रे सिन्धूनां पवमानो अर्षस्यग्रे वाचो अग्रियो गोषु गच्छसि. अग्रे वाजस्य भजसे महद्धन ꣳ स्वायुधः सोतृभिः सोम सूयसे.. (३) हे सोम! आप को हम स्तुतियों से आमंत्रित करते हैं. हम आप को शोधित और जलमय करने के समय भी स्तुति गाते हैं. आप अस्त्रशस्त्रमय हो कर आते हैं, गौ की रक्षा करते हुए आते हैं. आप प्रचुर धन देने के लिए भजे जाते हैं. (३) असृक्षत प्र वाजिनो गव्या सोमासो अश्व्या. शुक्रासो वीरयाशवः.. (४) हे सोम! आप प्रकाशमान, वेगवान व वीर हैं. यजमान गाएं, घोड़े और संतान पाने के लिए आप को परिष्कृत करते हैं. (४) शुम्भमाना ऋतायुभिर्मृज्यमाना गभस्त्योः. पवन्ते वारे अव्यये.. (५) हे सोम! यजमानों के हाथों से तैयार, परिष्कृत व जल मिला कर तैयार किया गया सोमरस सुशोभित हो रहा है. (५) ते विश्वादाशुषे वसु सोमा दिव्यानि पार्थिवा. पवन्तामान्तरिक्ष्या.. (६) हे सोम! आप यजमान को पृथ्वीलोक, अंतरिक्षलोक और स्वर्गलोक के सभी वैभव