सामवेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

सामवेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Samaveda Samhita with Hindi Translation
डा. रेखा व्यास द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
DevanagariSanskritpublished310 पृष्ठ
पृष्ठ 182, कुल 310 में से
संदर्भ में पढ़ेंपृष्ठ 182
कीजिए, जिस प्रकार सूर्य अपनी किरणों से अंतरिक्षलोक को प्रकाशित करते हैं. (७) आ तिष्ठ वृत्रहन्नथं युक्ता ते ब्रह्मणा हरी. अर्वाचीन ॐ सु ते मनो ग्रावा कृणोतु वग्नुना.. (८) हे इंद्र! आप वृत्रहंता हैं. आप के रथ में घोड़े (मंत्रों द्वारा) जोड़ दिए गए हैं. आप उस रथ में विराजिए, आइए और बैठिए. सोम को कूटते हुए पत्थरों की आवाजें आप के मन को आकर्षित करने में समर्थ हो सकें. (८) इन्द्रमिद्धरी वहतो ऽ प्रतिधृष्टशवसम्. ऋषीणा ॐ सुष्टुतीरुप यज्ञं च मानुषाणाम्.. (९) हे इंद्र! आप अपराजित हैं और सदैव शत्रुओं को हराते हैं. आप के घोड़े आप को यज्ञ स्थान तक पहुंचाने की कृपा करें. मनुष्यों के इस यज्ञ में ऋषि लोग स्तुतियां गा रहे हैं. (९)