सामवेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Samaveda Samhita with Hindi Translation
डा. रेखा व्यास द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 181, कुल 310 में से
संदर्भ में पढ़ेंसातवां खंड आ ते अग्न इधीमहि द्युमन्तं देवाजरम्. यद्ध स्या ते पनीयसी समिद्दीदयति द्यवीष २४ स्तोतृभ्य आ भर.. (१) हे अग्नि! आप अजर हैं. हम समिधाओं से आप को प्रदीप्त करते हैं. आप के प्रकाश से स्वर्गलोक द्युतिमान होता है. आप यजमानों को भरपूर धन प्रदान करने की कृपा कीजिए. (१) आ ते अग्न ऋचा हविः शुक्रस्य ज्योतिषस्पते. सुश्चन्द्र दस्म विश्पते हव्यवाट् तुभ्य २४ हूयत इष २४ स्तोतृभ्य आ भर.. (२) हे अग्नि! आप विश्वपालक, शत्रुनाशक, प्रकाशक, हविवाहक व आनंदवर्द्धक हैं. यजमान स्तुतियां पढ़ते हुए आप को आहुति प्रदान करते हैं. आप यजमानों को भरपूर धन प्रदान करने की कृपा कीजिए. (२) ओभे सुश्चन्द्र विश्पते दर्वी श्रीणीष आसनि. उतो न उत्पुपुर्या उक्थेषु शवसस्पत इष २४ स्तोतृभ्य आ भर.. (३) हे अग्नि! आप प्रजापालक, शक्तिमान और प्रकाशित हैं. आहुति देते समय मुख्य पात्र आप के मुख तक पहुंच जाते हैं. उपासक हवि भेंट कर के आप को प्रसन्न करना चाहते हैं. आप यजमानों को भरपूर वैभव प्रदान करने की कृपा कीजिए. (३) इन्द्राय साम गायत विप्राय बृहते बृहत्. ब्रह्मकृते विपश्चिते पनस्यवे.. (४) हे साम गायक ब्राह्मणो! इंद्र प्रशंसा के योग्य हैं. आप उन के लिए विस्तृत साममंत्र गाइए. इंद्र ज्ञानसाधक व उस के विस्तारक हैं. (४) त्वमिन्द्राभिभूरसि त्व २४ सूर्यमरोचयः. विश्वकर्मा विश्वदेवो महाँ असि.. (५) हे इंद्र! आप विश्व (संपूर्ण संसार के देव) और विश्वकर्मा (विश्व के संपूर्ण कार्य करने वाले) हैं. आप सूर्य को चमकाते हैं. आप की भूरिभूरि प्रशंसा की जाती है. (५) विभ्राजं ज्योतिषा स्व ३ गच्छो रोचनं दिवः. देवास्त इन्द्र सख्याय येमिरे.. (६) हे इंद्र! आप प्रकाश से चमकते हुए सुशोभित होते हैं. आप स्वर्गलोक को भी प्रकाशित करते हैं. सभी देवगण आप के सखा होना चाहते हैं. कृपया आप पधारिए. (६) असावि सोम इन्द्र ते शविष्ठ धृष्णवा गहि. आत्वा पृणक्तिवन्द्रिय २४ रजः सूर्यो न रश्मिभिः.. (७) हे इंद्र! आप शत्रुओं को हराते हैं. आप सामर्थ्यवान हैं. आप पधारने की कृपा कीजिए. आप के लिए सोमरस भेंट किया गया है. आप हमारे यज्ञ को पधार कर उसी प्रकार प्रकाशित ebook converter DEMO Watermarks*