भारतकोश
सामवेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

सामवेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Samaveda Samhita with Hindi Translation

डा. रेखा व्यास द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished310 पृष्ठ

पृष्ठ 188, कुल 310 में से

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पृष्ठ 188

हे इंद्र! आप सभी दुष्टों का नाश करिए. आप हमारे उत्तम कार्यों में बाधक शत्रुओं का नाश कीजिए. आप हमें मनोवांछित धन प्रदान करने की कृपा कीजिए. (७) यस्य ते विश्वमानुषग्भूरेर्दत्तस्य वेदति. वसु स्पाईं तदा भर.. (८) हे इंद्र! आप प्रचुर धन देते हैं. यह हम जानते हैं. आप हमें भरपूर धन देने की कृपा कीजिए. (८) यद्दीडाविन्द्र यत्स्थिरे यत्पर्शाने पराभृतम्. वसु स्पार्हं तदा भर.. (९) हे इंद्र! आप हमें वह सारा धन देने की कृपा कीजिए, जिसे आप ने शत्रुओं से जीता है तथा जिसे आप सब से छिपा कर (दूसरों को दिए बिना ही) सुरक्षित और अभेद्य जगह पर रखे हुए हैं. (९) यज्ञस्य हि स्थ ऋत्विजा सस्नी वाजेषु कर्मसु. इन्द्राग्नी तस्य बोधतम्.. (१०) हे इंद्र! हे अग्नि! आप यज्ञ के ऋत्विज् हैं. यज्ञ के कामों में आप की पवित्रता बनी रहती है. आप हमारी प्रार्थनाओं पर ध्यान देने की कृपा कीजिए. (१०) तोशासा रथयावाना वृत्रहणापराजिता. इन्द्राग्नी तस्य बोधतम्.. (११) हे इंद्र! हे अग्नि! आप दुश्मनों से अपराजित, रथ से यात्रा करने वाले व दुष्टों के नाशक हैं. आप हमारी स्तुतियों पर ध्यान देने की कृपा कीजिए. (११) इदं वां मदिरं मध्वधुक्षन्नद्रिभिर्नर. इन्द्राग्नी तस्य बोधतम्.. (१२) हे इंद्र! हे अग्नि! यजमानों ने आप के लिए मददायी मधुर सोमरस तैयार किया है. आप हमारी स्तुतियों पर ध्यान देने की कृपा कीजिए. (१२) चौथा खंड इन्द्रायेन्दो मरुत्वते पवस्व मधुमत्तमः. अर्कस्य योनिमासदम्.. (१) हे सोम! आप मददायी, मधुरतम और पवित्र हैं. आप मरुद्गणों के साथ आने वाले इंद्र के लिए झरने की कृपा कीजिए. (१) तं त्वा विप्रा वचोविदः परिष्कृण्वन्ति धर्णसिम्. सं त्वा मृजन्त्यायवः.. (२) हे सोम! आप संसार के धारक व वाणी के ज्ञाता हैं. याजक आप को भलीभांति परिष्कृत कर रहे हैं. (२) रसं ते मित्रो अर्यमा पिबन्तु वरुणः कवे. पवमानस्य मरुतः.. (३) हे सोम! आप विद्वान् हैं. मित्र, वरुण, अर्यमा और मरुद्गण आप के रस को पीने की कृपा करें. (३) ebook converter DEMO Watermarks*