भारतकोश
सामवेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

सामवेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Samaveda Samhita with Hindi Translation

डा. रेखा व्यास द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished310 पृष्ठ

पृष्ठ 190, कुल 310 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 190

आ यद् दुवः शतक्रतवा कामं जरितॄणाम्. ऋतोरक्षं न शचीभिः.. (३) हे इंद्र! आप सैकड़ों यज्ञों वाले हैं. आप उपासकों की मनोकामना पूरी करने की कृपा कीजिए. रथ को जैसे उस के पहियों से गति मिलती है, वैसे ही आप की कृपा से उपासकों को धन मिलता है. (३) सुरूपकृत्नुमूतये सुदुघामिव गोदुहे. जुहूमसि द्यविद्यवि.. (४) हे इंद्र! आप का स्वरूप सुंदर है. गाय दुहने के समय जैसे ग्वाले गायों को पुकारते हैं, उसी प्रकार हम अपनी रक्षा के लिए आप को पुकारते हैं, आमंत्रित करते हैं. (४) उप नः सवना गहि सोमस्य सोमपाः पिब. गोदा इद्वेवतो मदः.. (५) हे इंद्र! आप सोमपान करने वाले हैं. आप सोमरस पीने के लिए हमारे सवन (यज्ञ संध्या) में पधारने की कृपा कीजिए. आप सोमरस पी कर प्रसन्न होइए. आप यजमानों को गोधन, वैभव, ऐश्वर्य और आनंद प्रदान करने की कृपा कीजिए. (५) अथा ते अन्तमानां विद्याम सुमतीनाम्. मा नो अति ख्य आ गहि.. (६) हे इंद्र! सोमरस पीने के बाद हमें अपनी सुमतियों का दर्शन कराइए. आप हम से विमुख मत होइए. आप दुष्टों को यह ज्ञान देने की कृपा मत कीजिए. आप से यही हमारा अनुरोध है. (६) उभे यदिन्द्र रोदसी आप्राथोषा इव. महान्तं त्वा महीना ॐ सप्राजं चर्षणीनाम्. देवी जनित्र्यजीजनद्भद्रा जनित्र्यजीजनत्.. (७) हे इंद्र! आप भी उषा की भांति स्वर्गलोक और पृथ्वीलोक को अपने प्रकाश से भरने की कृपा कीजिए. आप महान, महिमाशाली, पृथ्वी के राजा व अदिति आप की जननी है. (७) दीर्घ ॐ ह्यङ्कुशं यथा शक्तिं बिभर्षि मन्तुमः. पूर्वेण मघवन्पदा वयामजो यथा यमः. देवी जनित्र्यजीजनद्भद्रा जनित्र्यजीजनत्.. (८) हे इंद्र! आप ज्ञान के भंडार, शक्ति व सामर्थ्य धारक हैं. आप को देवताओं की माता ने जना है. आप को कल्याणकारिणी जननी ने जना है. बकरा जैसे आगे के पैरों से अपने भोज्य पदार्थों को नियंत्रित करता है, उसी तरह आप दुष्टों को वश में करते हैं. (८) अव स्म दुर्हणायतो मर्त्तस्य तनुहि स्थिरम्. अधस्पदं तर्मीं कृधि यो अस्माँ अभिदासति. देवी जनित्र्यजीजनद्भद्रा जनित्र्यजीजनत्.. (९) हे इंद्र! आप को देवताओं की माता ने जना है. आप को कल्याणकारिणी माता ने जना ebook converter DEMO Watermarks*

सामवेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित) · पृष्ठ 190, कुल 310 में से · BharatKosha