सामवेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Samaveda Samhita with Hindi Translation
डा. रेखा व्यास द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 191, कुल 310 में से
संदर्भ में पढ़ेंहै. आप हमें अधीन (पराधीन) बनाने वाले दुष्ट शत्रुओं का नाश करने की कृपा कीजिए. (९) छठा खंड परि स्वानो गिरिष्ठाः पवित्रे सोमो अक्षरत् मदेषु सर्वधा असि.. (१) हे सोम! आप पर्वतवासी, पवित्र, प्रसन्नतादायी और प्रसन्नतादायकों में सर्वश्रेष्ठ हैं. आप का रस धारा रूप में झर रहा है. (१) त्व विप्रस्त्वं कविर्मधु प्र जातमन्धसः मदेषु सर्वधा असि.. (२) हे सोम! आप ब्राह्मण, कवि (विद्वान्) व आप अन्न से पैदा होने वाले पोषक तत्त्वों को देते हैं. आप प्रसन्नता देने वालों में सर्वश्रेष्ठ हैं. (२) त्वे विश्वे सजोषसो देवासः: पीतिमाशत. मदेषु सर्वधा असि.. (३) हे सोम! सभी देवता आप को पीने के इच्छुक रहते हैं. प्रसन्नता देने वालों में आप सर्वश्रेष्ठ हैं. (३) स सुन्वे यो वसूनां यो रायामानेता य इडानाम्. सोमो यः सुक्षितीनाम्.. (४) हे सोम! आप हमें अच्छी संतान, गाएं और ऐश्वर्य देते हैं. आप सुंदर पृथ्वी पर सुशोभित हैं. (४) यस्य त इन्द्रः पिबाद्यस्य मरुतो यस्य वार्यमणा भगः. आ येन मित्रावरुणा करामह एन्द्रमवसे महे.. (५) हे सोम! आप के दिव्य रस को मरुत्, इंद्र अर्यमा, भग आदि पीते हैं. आप सुरक्षा हेतु जैसे मित्र और वरुण को बुलाते हैं, उसी प्रकार हम इंद्र को बुलाते हैं. (५) तं वः सखायो मदाय पुनानमभि गायत. शिशुं न हव्यैः स्वदयन्त गूर्तिभिः.. (६) हे यजमानो! आप मद के लिए पिए जाने वाले सोमरस के गुण गाइए. वे हमारे सखा हैं. मां जैसे बच्चे की शोभा बढ़ाती है, वैसे ही आप हवि और स्तोत्र से सोम की शोभा बढ़ाइए. (६) सं वत्स इव मातृभिरिन्दुहिन्व्हानो अज्यते. देवावीर्मदो मतिभिः परिष्कृतः.. (७) हे सोम! आप दिव्य व मददायी हैं. आप को बुद्धि द्वारा परिष्कृत किया गया है. माता जैसे पुत्र को जल से परिष्कृत करती है, उसी तरह जल से आप को परिष्कृत किया गया है. (७) अयं दक्षाय साधनो ऽ य २४ शर्धाय वीतये. अयं देवेभ्यो मधुमत्तरः सुतः.. (८) हे सोम! आप मधुर हैं. आप को देवताओं के लिए विधिवत परिष्कृत किया गया है. ebook converter DEMO Watermarks*