सामवेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Samaveda Samhita with Hindi Translation
डा. रेखा व्यास द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 192, कुल 310 में से
संदर्भ में पढ़ेंशक्तिदायी साधन के रूप में आप को पिया जाता है. (८) सोमाः पवन्त इन्दवो ऽ स्मभ्यं गातुवित्तमाः. मित्रा स्वाना अरेपसः स्वाध्यः स्वर्विदः.. (९) हे सोम! आप पवित्र व मित्र की तरह हैं. आप हमें श्रेष्ठ उद्देश्यों की ओर प्रेरित करते हैं. आप आत्मज्ञाता और प्रकाशमान हैं. आप उपासना के योग्य हैं. (९) ते पूतासो विपश्चितः सोमासो दध्याशिरः. सूरासो न दर्शतासो जिगत्नवो ध्रुवा घृते.. (१०) हे सोम! आप पवित्र हैं, सूर्य जैसे प्रकाशमान हैं. आप विलक्षण व दही मिश्रित हैं. आप ध्रुव (स्थिर) हैं. आप जल धारा से मिश्रित हो कर शुद्ध होते हैं. (१०) सुषवाणासो व्यद्रिभिश्चिताना गोरधि त्वचि. इषमस्मभ्यमभितः समस्वरन्वसुविदः.. (११) हे सोम! आप धनदाता हैं. आप हमें श्रेष्ठ धन प्रदान करने की कृपा कीजिए. आप पृथ्वी के ऊपर निवास करते हैं. अनेक पत्थरों से कूट कर आप का रस निचोड़ा जाता है. (११) अया पवा पवस्वैना वसूनि मा ꣫ श्रुत्व इन्दो सरसि प्र धन्व. ब्रध्नश्चिद्यस्य वातो न जूर्ति पुरुमेधाश्चित्तकवे नरं धात्.. (१२) हे सोम! आप हमें पवित्र धाराओं से सराबोर करिए. आप हमें धन से परिपूर्ण कीजिए. आप के रस के सेवन से सूर्य भी वायु की तरह हल्के और गतिशील हो जाते हैं. इंद्र सोमरस पी कर हमें नेतृत्व शक्ति प्रदान करते हैं, अच्छी संतान प्रदान करते हैं. (१२) उत न एना पवया पवस्वाधि श्रुते श्रवाय्यस्य तीर्थे. षष्टि ꣫ सहस्रा नैगुतो वसूनि वृक्षं न पक्वं धूनवद्रणाय.. (१३) हे सोम! आप उपासना के योग्य हैं. आप हमारे यज्ञतीर्थ में पवित्र धाराओं से झरिए. पेड़ों से जैसे पके फल मिलते हैं, वैसे ही शत्रुनाश हेतु आप हमें सहस्रगुना धन प्रदान करने की कृपा कीजिए. (१३) महीमे अस्य वृष नाम शूषे मा ꣫ श्रुत्वे वा पृशने वा वधत्रे. अस्वापयन्निगुतः सेहयच्चाषामित्राँ अपाचितो अचेतः.. (१४) हे सोम! आप महिमाशाली हैं और सुख बरसाते हैं. आप दुष्टों को हराते व शत्रु को हम से दूर करते हैं. आप उन सभी शत्रुओं को बलहीन बनाते हैं, नष्ट करते हैं, जो युद्ध में हमें हानि पहुंचाने वाले हैं. (१४) सातवां खंड ebook converter DEMO Watermarks*