सामवेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Samaveda Samhita with Hindi Translation
डा. रेखा व्यास द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 195, कुल 310 में से
संदर्भ में पढ़ेंआठवां अध्याय पहला खंड प्र काव्यमुशनेव ब्रुवाणो देवो देवानां जनिमा विवक्ति. महिव्रतः शुचिबन्धुः पावकः पदा वराहो अभ्येति रेभन्.. (१) उपासक उशना के समान श्रेष्ठ वाणी वाले हैं. वे देवताओं की जीवनी को अच्छी तरह प्रस्तुत करते हैं. सोम पवित्र, प्रकाशित व पोषक हैं. आप परिष्कृत होते समय शब्द करते हुए द्रोणकलश में जाते हैं. (१) प्र ह २४ सासतृपला वग्नुमच्छाम्रादस्तं वृषगणा अयासुः. अङ्घोषिणं पवमानं २४ सखायो दुर्मर्षं वाणं प्र वदन्ति साकम्.. (२) शत्रुओं की शक्ति से बुद्धिमान यजमान भी घबरा जाते हैं. वे शीघ्र वहां पहुंचे, जहां सोम तैयार किया जा रहा था. वे वहां पवित्र सोम के लिए वाद्ययंत्र बजाने लगे, जिस से मधुर ध्वनि होने लगी. सोम की कृपा से असहनीय शत्रु को भी दबाया जा सकता है. (२) स योजत उरुगायस्य जूतिं वृथा क्रीडन्तं मिमते न गावः. परीणसं कृणुते तिग्मशृङ्गो दिवा हरिर्ददृशे नक्तमृज्रः.. (३) हे सोम! सहज रूप से खेलते हुए आप प्रशंसित गति पाते हैं, उस गति को किसी के द्वारा नापा नहीं जा सकता. आप दिन में हरी और रात्रि में सफेद (उज्ज्वल) आभा वाले होते हैं. (३) प्र स्वानासो रथा इवार्वन्तो न श्रवस्यवः. सोमासो राये अक्रमुः.. (४) हे सोम! घोड़े और रथ की तरह (वेग से) आवाज करता हुआ सोमरस पवित्र हो रहा है. यह हमें अपार वैभव प्रदान करने की कृपा करे. (४) हिन्वानासो रथा इव दधन्विरे गभस्त्योः. भरासः कारिणामिव.. (५) हे सोम! आप का रस यजमान वैसे ही धारण करते हैं, जैसे भारवाही दोनों हाथों से बोझा उठाता है. रथ जैसे युद्ध में जाते हैं, वैसे ही सोमरस यज्ञ में ले जाया जा रहा है. (५) राजानो न प्रशस्तिभिः सोमासो गोभिरञ्जते. यज्ञो न सप्त धातृभिः.. (६) राजाओं की प्रशंसा और सात यजमानों से यज्ञ स्थापित किया जाता है. गाय के घी ebook converter DEMO Watermarks*