भारतकोश
सामवेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

सामवेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Samaveda Samhita with Hindi Translation

डा. रेखा व्यास द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished310 पृष्ठ

पृष्ठ 196, कुल 310 में से

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पृष्ठ 196

आदि से सोमरस को परिष्कृत किया जाता है. (६) परि स्वानास इन्दवो मदाय बर्हणा गिरा. मधो अर्षन्ति धारया.. (७) श्रेष्ठ प्रार्थनाओं से सोमरस की स्तुति की जाती है. इंद्र को मदमस्त बनाने के लिए सोमरस मधुर धाराओं से पात्र में गिरता है. (७) आपानासो विवस्वतो जिन्वन्त उषसो भगम्. सूरा अण्वं वि तन्वते.. (८) सोमरस उषा को तेजस्विनी बनाता है. इंद्र के पीने के लिए सोमरस को परिष्कृत किया जा रहा है. (८) अप द्वारा मतीनां प्रत्ना ऋष्वन्ति कारवः वृष्णो हरस आयवः.. (९) हे सोम! आप पुरातन हैं. यजमान आप का आह्वान करते हैं. यजमान आप के लिए स्तुति कर रहे हैं. वे आप के लिए यज्ञ द्वारों को उद्घाटित कर रहे हैं (खोलते हैं). (९) समीचीनास आशत होतारः सप्तजानयः पदमेकस्य पिप्रतः.. (१०) हे सोम! सोमयज्ञ को पूर्णता देने के लिए उपयुक्त जाति के सात याज्ञिक यज्ञ अनुष्ठान को पूरा करने के लिए उपस्थित होते हैं. (१०) नाभा नाभिं न आ ददे चक्षुषा सूर्यं दृशे. कवेरपत्यमा दुहे.. (११) सोम विद्वान् हैं. उन्हें हम अपने और अपनी संतान के कल्याण के लिए अपनी नाभि के पास स्थापित करते हैं. सोम यज्ञ की नाभि जैसे हैं. नेत्रों से जैसे हम सूर्य के दर्शन करते हैं, वैसे ही हम इन के (सोम के) दर्शन करें. (११) अभि प्रियं दिवस्पदमध्वर्युभिर्गुहा हितम्. सूरः पश्यति चक्षसा.. (१२) शूरवीर इंद्र अपने नेत्रों से सोम को देखते हैं. सोम स्वर्गलोक में प्रिय हैं. अध्वर्यु उन्हें (सब के) हृदय में स्थापित करते हैं. (१२) दूसरा खंड असृग्रमिन्दवः पथा धर्मन्नृतस्य सुश्रियः. विदाना अस्य योजना.. (१) हे सोम! आप ऋत् (सत्य) व श्रेष्ठ मार्ग पर चलते हैं. आप यज्ञ व यजमान को भलीभांति जानते हैं. (१) प्र धारा मधो अग्रियो महीरपो वि गाहते. हविर्हविःषु वन्द्य.. (२) सोम हवियों में श्रेष्ठ हवि व वंदनीय हैं. आप की धारा उत्कृष्ट, मधुर एवं अग्रणी है. आप की धारा जल में अवगाहन करती है. (२) ebook converter DEMO Watermarks*

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