सामवेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Samaveda Samhita with Hindi Translation
डा. रेखा व्यास द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 197, कुल 310 में से
संदर्भ में पढ़ेंप्र युजा वाचो अग्रियो वृषो अचिक्रदद्वने. सद्माभि सत्यो अध्वरः.. (३) हे सोम! आप का मार्ग सत्यता का है. आप शक्तिमान, अग्रणी व वाणी को जोड़ने वाले हैं. सोम जल के साथ यज्ञशाला के भीतर प्रवेश करते हैं. (३) परि यत्काव्या कविर्नृम्णा पुनानो अर्षति. स्वर्वाजी सिषासति.. (४) सोम कवि हैं. कवि सोम जैसे ही मनुष्य की स्तुति स्वीकारते हैं, वैसे ही इंद्र यज्ञ स्थान पर अपनी शक्ति सहित आने के लिए तैयार हो जाते हैं. (४) पवमानो अभि स्पृधो विशो राजेव सीदति. यदीमृण्वन्ति वेधसः.. (५) सोम पवित्र हैं. वे राजा के समान सुशोभित होते हैं. वे प्रजा के संरक्षण हेतु शत्रुओं का नाश करने के लिए तैयार रहते हैं. (५) अव्या वारे परि प्रियो हरिर्वनेषु सीदति. रेभो वनुष्यते मती.. (६) सोमरस जल से ओतप्रोत और हरी आभा वाला है. सोम यजमान की प्रार्थनाओं को स्वीकार रहे हैं. वे आवाज करते हुए द्रोणकलश में स्थान ग्रहण कर रहे हैं. (६) स वायुमिन्द्रमश्विना साकं मदेन गच्छति. रणा यो अस्य धर्मणा.. (७) जो यजमान धर्मपूर्वक सोमरस को निचोड़ते हैं, वे वायु, इंद्र और अश्विनीकुमारों के साथ आनंद प्राप्त करते हैं. (७) आ मित्रे वरुणे भगे मधोः पवन्त ऊर्मयः. विदाना अस्य शक्मभिः.. (८) हे सोम! यजमान आप को (आप की सामर्थ्य को) जान सकें. मित्र, वरुण व भग के लिए आप की मधुर एवं पवित्र लहरें उमड़ती हैं. (८) अस्मभ्य ૠ रोदसी रयिं मध्वो वाजस्य सातये. श्रवो वसूनि सञ्जितम्.. (९) हे सोम! आप स्वर्गलोक तथा पृथ्वीलोक के स्वामी हैं. हमें आप शक्ति और अपार वैभव प्रदान करने की कृपा कीजिए. हम आप से संचित वैभव पाना चाहते हैं. (९) आ ते दक्षं मयोभुवं वह्निमद्या वृणीमहे. पान्तमा पुरुस्पृहम्.. (१०) हे सोम! आप दक्ष व वह्निमान (प्रकाशमान) हैं. आप को बहुत लोग चाहते हैं. हम आप के बल और शक्ति को प्राप्त करना चाहते हैं. (१०) आ मन्द्रमा वरेण्यमा विप्रमा मनीषिणम्. पान्तमा पुरुस्पृहम्.. (११) हे सोम! आप को बहुत लोग चाहते हैं. आप वरेण्य, ब्राह्मण, मनीषी व संरक्षणशील हैं. हम आप की उपासना करते हैं. (११) आ रयिमा सुचेतुनमा सुक्रतो तनूष्वा. पान्तमा पुरुस्पृहम्.. (१२) ebook converter DEMO Watermarks*