भारतकोश
सामवेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

सामवेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Samaveda Samhita with Hindi Translation

डा. रेखा व्यास द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished310 पृष्ठ

पृष्ठ 198, कुल 310 में से

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पृष्ठ 198

हे सोम! आप को बहुत लोग चाहते हैं. आप श्रेष्ठ यज्ञ वाले और उत्तम कार्य करने वाले हैं. आप हमें धन, बल और संतान प्रदान करने की कृपा कीजिए. (१२) तीसरा खंड मूर्धानं दिवो अरतिं पृथिव्या वैश्वानरमॄत आ जातमग्निम्. कवि ᳲ सम्राजमतिथिं जनानामासन्नः पात्रं जनयन्त देवाः.. (१) हे अग्नि! आप स्वर्गलोक में मूर्धन्य हैं. आप यज्ञ में प्रकट होते हैं. आप पृथ्वी पर भ्रमणशील हैं. आप कवि, सम्राट् व अतिथि हैं. आप लोगों के निकटवर्ती हैं. आप देवताओं को प्रकट करते हैं. (१) त्वां विश्वे अमृतं जायमान ᳲ शिशुं न देवा अभि सं नवन्ते. तव क्रतुभिरमृतत्वमायन् वैश्वानर यत्पित्रोरदीदेः.. (२) हे अग्नि! आप विश्व रूप व अमृत स्वरूप हैं. आप संसार के स्वामी (नायक) हैं. आप यज्ञों द्वारा अमरता पाते हैं. आप की कृपा से यजमान दिव्यता प्राप्त करते हैं. (२) नाभिं यज्ञाना ᳲ सदन ᳲ रयीणां महामाहावमभि सं नवन्त. वैश्वानर ᳲ रथ्यमध्वराणां यज्ञस्य केतुं जनयन्त देवाः.. (३) हे अग्नि! आप यज्ञ की नाभि धन के भंडार, महिमावान, यज्ञ के संचालक व यज्ञ की पताका हैं. आप को अरणि मंथन से उत्पन्न किया जाता है. हम आप का आह्वान करते हैं. (३) प्र वो मित्राय गायत वरुणाय विपा गिरा. महिक्षत्रावृतं बृहत्.. (४) हे यजमानो! मित्र और वरुण महान, क्षात्रवान व विशाल हैं. आप इन देवों के लिए ऊंचे स्वर से स्तोत्र गाइए. दोनों देव उन स्तोत्रों को सुनने के लिए यज्ञ स्थान पर पधारने की कृपा करें. (४) सम्राजा या घृतयोनी मित्रश्चोभा वरुणश्च. देवा देवेषु प्रशस्ता.. (५) हे यजमानो! मित्र और वरुण ये दोनों देव देवताओं में प्रशंसित हैं. दोनों देव सम्राट् हैं. दोनों देव प्रकाश उत्पन्न करते हैं. (५) ता नः शक्तं पार्थिवस्य महो रायो दिव्यस्य. महि वां क्षत्रं देवेषु.. (६) हे मित्र! हे वरुण! आप महान एवं देवताओं के बीच सराहनीय हैं. आप पृथ्वीलोक और स्वर्गलोक का वैभव हमें प्राप्त कराने की कृपा कीजिए. (६) इन्द्रा याहि चित्रभानो सुता इमे त्वायवः. अण्वीभिस्तना पूतासः.. (७) ebook converter DEMO Watermarks*